क़िताबें

व्यक्तित्व

यूं ही नहीं लिख जाती, फिर कोई कविता।। बार-बार पढ़ना पड़ता है, अतीत के पन्नों को, और बार-बार पकड़ना पड़ता है, वर्तमान की परछाइयों को, यादों के झरोखे, बारी-बारी से बंद और खोले जाते हैं, तब कहीं रचती है एक नई कविता।। कभी गोते लगाना पड़ते हैं, कल्पनाओं के समुन्दर […]

शब्दों को एक माला मे पिरोना उन्हें भावों के धागो मे बांधना चुन चुन कर विभिन्न रस से जोड़ अपने मन की बात को रखना किस ने सोचा मैं ये सब कर पाऊँगी कभी सोचा ना था मैंने भी की मैं कविता लिख पाऊँगी धन्यवाद इस कला का जिसने इतना […]

पढ़ा था बहुत प्रेम को पुस्तकों में गया भूल सब तुमसे मिलने के बाद नया पाठ्यक्रम था नयी थी कहानी नहीं काम आया सबक था जो याद नहीं प्रेम होता लकीरों पे चलना नया हो फ़साना नयी हो रवानी अर्पण हो तन मन समर्पित हो जीवन रहे प्रेम पावन चढ़े […]

भावों को आकार देती कविता, शब्द भाव से बनती सरिता। परिवेश संग कल्पना से, बहती शब्द गंगा। जहां न पहुंचे रवि ! वहां वहां कवि पहुंचता । कवि अपनी लेखनी सहारे गागर में सागर भरता। एक पग जमीं दूजे पग अंबर, शब्द भाव चलते चलता। शब्द भाव की सरिता में, […]

अक्षरों की आराधना से शब्दों का सामर्थ्य बनता है, और वही शब्द मिलकर अभिव्यक्त करते हैं मन के प्रकाश को, मनोभावों को, संवेदना और सत्य को, शाश्वत और अटल को, जागरण और अभिव्यक्ति को, जन की पीड़ा को, मानस के संवेग को, प्रेम को, विरह को, शृंगार को, आह्लाद को, […]

● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मोक्षदायिनी नर्मदा अपने सुरम्य सौंदर्य और पाप नाशिनी स्वरूप में कलयुग में विद्यमान है और इसके तटीय साम्राज्य में अनगिनत शिव तीर्थ हैं, जो ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं। ऐसे ही तीर्थों में एक तीर्थ मध्यप्रदेश में नर्मदा के उत्तर तट पर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।