यूं ही नहीं लिख जाती, फिर कोई कविता।। बार-बार पढ़ना पड़ता है, अतीत के पन्नों को, और बार-बार पकड़ना पड़ता है, वर्तमान की परछाइयों को, यादों के झरोखे, बारी-बारी से बंद और खोले जाते हैं, तब कहीं रचती है एक नई कविता।। कभी गोते लगाना पड़ते हैं, कल्पनाओं के समुन्दर […]
