किरदार निभाते सब अपना कर्म निभाते सब अपना जीवन रूपी इस यात्रा मे सुख अपना दुख भी अपना जन्म के साथ यात्रा चलती संघर्षो के साथ आगे बढ़ती संस्कार से सुपथ बनता विकर्मो से भाग्य बिगड़ता सृष्टि रूपी जीवनगाड़ी मे कोई चढ़ता कोई उतरता इस गाड़ी का प्रभु नियन्ता वही […]

सुन लो साहब !मेरी भी, मैं तो एक मजदूर हूँ। किस्मत का मारा मैं बेचारा, प्रभु की रहमत से दूर हूँ। लॉक डाउन हुआ है जब से, रोजगार कोई मिलता नहीं। दो वक्त की रोटी का भी , जुगाड़ कोई करता नहीं। हर रोज़ निकलता हूँ घर से, पर काम […]

जिंदगी कितनी मिली ये कभी मत सोचो। जिंदगी में क्या कुछ तुम्हें मिला ये सोचो। जिंदगी मिली है तुम्हें कुछ करने के लिए। इसे तुम यूही मत बिना वजह के गवाओं।। जिंदगी को तुम समझो और इसका मनन करो। फिर मायाने जिंदगी के लोगों के जहन में बैठाओं। कर सके […]

जिस दर्द से तू अनभिज्ञ रहा, हर माह सहन वह करती है। गर्भ से बाहर लाने तक, अक्षम्य पीड़ा को सहती है।। माहवारी जिसे नापाक कहा, नींव अस्तित्व की रखती है। सुख-दुःख में एक समान रहे, हर सुख तुझमे ही भरती है।। सौंदर्य का त्याग सदा करती, नौ माह पेट […]

व्यर्थ चिंतन को छोड़कर कर लो कुछ उपकार संकट में घिरे है जो जन मोचक बन करो परोपकार पीड़ित सेवा परमात्म सेवा यही सुख आधार बनेगी रोते हुओ को हंसाने का यही जीवन आधार बनेगी स्वयं बदलो जग बदलेगा यह धारणा खूब जमेगी कांटे से फूल बनाने की यह युक्ति […]

रोते को अब हँसाने की बात करो उजड़े घर को बसाने की बात करो मीनारें जगमगा उठे भरे रोशनी से आशियाने जरा सजाने की बात करो कायम रहे इंसानियत मिला लो दिल जो रूठ गए उसे मनाने की बात करो छोड़ गए गाँव चले गए मीलों जो दूर वापस उन्हें […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।