सवाल-जवाब

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मातृभाषा.कॉम क्या है?

मातृभाषा.कॉम हिन्दी वेबसाइट है जिसका मक़सद हिन्दी के नवोदित और स्थापित रचनाकार जो भाषा सारथी है उनकी रचनाओं को सहेज कर लोगों तक आन लाइन उपलब्ध कराना है जो इससे गहरा लगाव रखते है और इसका आनन्द लेना चाहते हैं। वेबसाइट पर इस समय लगभग १२०० से ज़्यादा रचनाकारों की रचनाएँ उपलब्ध हैं जिनमें बढ़ोतरी जारी है। इस वेबसाइट का सबसे विशिष्ट पहलू ये है कि इसमें यह अंकरूपण के साथ-साथ हिन्दी भाषा के विस्तार हेतु भी प्रयासरत है। मातृभाषा.कॉम’ वेबसाइट को अधिक से अधिक फैलाने के लिए, अब नई टेक्नालोजी का इस्तेमाल करके डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटर के साथ साथ टैबलेट  और मोबाइल फ़ोन पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

मातृभाषा.कॉम के सक्रिय दल में कौन है?

मातृभाषा.कॉम का मुख्यालय इंदौर में है। हिन्दी भाषा के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित दल जिसके संस्थापक डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ है और सह संस्थापक श्रीमती शिखा जैन के साथ संचालक मंडल  मृदुल जोशी- आलेख अभिकल्पी ( ग्राफिक डिजाइनर) व सम्पादकीय विभाग में कमलेश कमल – (जबलपुर, मध्यप्रदेश) साहित्य संपादक, रिखबचंद राँका ‘कल्पेश’ (जयपुर, राजस्थान)- सहायक संपादक,वासिफ काजी (इंदौर, मध्यप्रदेश)- सहायक संपादक, चेतन बेंडाले – सहायक अभियंता के साथ युवाओ का एक ऊर्जावान दल  हिड्नी को प्रचारित और प्रसारित करने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं। ताकि लाखों पाठकों और लेखकों के आपसी जुड़ाव वाले इस मंच को अधिक अच्छा और सरल बनाया जा सके।

मातृभाषा.कॉम का उद्देश्य क्या है ?

भारत में मातृभाषा हिन्दी के रचनाकारों की बहुत लंबी सूची है, किन्तु समस्या यह है कि उन रचनाओं को सहेजकर एक ही स्थान पर पाठकों के लिए उपलब्ध करवाने में असफलता मिलती है। इस दिशा में ‘मातृभाषा.कॉम‘ ने पहल की है,हम इस कार्य को बखूबी करेंगे। साथ ही आगामी दिनों में विद्यालय-महा विद्यालयों में हिन्दी के प्राथमिक ककहरा से लेकर अन्य विधाओं का परिचय करवाते हुए वर्तमान स्थिति को अवगत करवाने के उद्देश्य से कार्यशालाएँ भी लगाएँगे, साथ ही यदि कोई हिन्दी सीखना भी चाहता है तो उसे निशुल्क शिक्षण उपलब्ध करवाएँगे। मातृभाषा केवल एक पोर्टल नहीं बल्कि भविष्य में हिन्दी के विस्तार हेतु आंदोलन बनेगा।

कौन सी डिवाईस पर आप पढ़ सकते हैं ?

मातृभाषा.कॉम की मोबाईल एंड्राइड एप्लिकेशन के साथ आप किसी भी मोबाईल डिवाइस से मंच पर जुड़ सकते हैं। इसके अलावा लैपटॉप/डेस्कटॉप ,टेबलेट, आई-पैड आदि डिवाईसों से भी आप मातृभाषा.कॉम से जुड़ सकते हैं।

मातृभाषा.कॉम के साथ आप कैसे जुड़ सकते हैं?

आप एक पाठक के रूप में मातृभाषा से जुड़ कर कविता, आलेख, व्यंग, लघुकथा, चिकित्सा से जुड़े आलेख, घनाक्षरी, हाईकु, कहानियों आदि का आनंद ले सकते हैं। अगर आप एक लेखक के तौर पर जुड़ना चाहें तो आपको प्रथम बार अपना सम्पूर्ण परिचय, मय छाया चित्र के साथ अपनी एक रचना अणुडाक (ईमेल) matrubhashaa@gmail.com के माध्यम से भेज सकते है या व्हाट्सप्प +91-9406653005 पर भेज सकते है। इसके भेजने  के एक या दो कार्यदिवस में आपकी प्रथम रचना प्रकाशित हो जाएगी, इसके बाद आपको अगली बार अपने मेल से रचनाएँ भेजना होगा।  किसी प्रकार की कठिनाई होने पर या कोई संशय हो या फिर कोई जानकारी आप चाहते हों तो हमें मेल करें। हम चौबीस घंटे के अंदर आपके प्रश्नों का जवाब देंगे।

आपके अन्य कोई प्रश्न के लिए

कृपया हमें मेल करें matrubhashaa@gmail.com पर। हम यथासंभव शीघ्र उत्तर देंगे।

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।