डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ देश की माटी का गौरव, समाज का अस्तित्व, जन का मान, सर्वहारा वर्ग की चिन्ता, हर तबके का विशेष ख़्याल, भाषाई एकता और अखण्डता के बीच हिन्दी की स्वीकार्यता, राष्ट्र की आज़ादी के रण के नायक, नेतृत्वकर्ता, सत्यवादी, मितव्ययी, स्वावलम्बी, समरस और सर्वहितैषी, राजनीति की कलुषता […]

‘इश्क़’ शब्द से शुरू हुई एक कहानी, न जाने कितने रिश्तों को जन्म देती है। कहानी के मूल में कोई तत्त्व है तो वह प्रेम, भाव, स्नेह, प्रीत, मोह है। इसी मोह के धागे से बँधा जीवन नेहल होता है। प्रेम आत्मा के मनोभावों को परमात्मा तत्त्व से एकाकार करता […]

शिखा अर्पण जैन, इन्दौर आधुनिक युग में बहुत सारी समस्याओं का सामना हमें करना पड़ रहा है, उसमें सबसे बड़ी समस्या है यातायात की समस्या। ये कुछ लोगों के लिए समस्या नही होगी, पर आप अगर महानगरों की बात करें जैसे दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरू, इंदौर तो यहाँ यातायात की सुगमता […]

◆ शिखा अर्पण जैन, इंदौर शब्द बदलें, काम बदला, तारीख़ बदली, साल बदला, केलेण्डर बदलें, युग बदला, पर कही कुछ आज भी बदलने से रह गया है तो वह है समाज की सोच। कहते हैं आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं पर हमारा सोचने का तरीका बिल्कुल अट्ठारवीं […]

यह अचानक क्या हुआ? मुझ में ऐसी शक्ति कहां से आई? क्या मुझे भी मकड़ी ने काटा है? काटा है तो कब काटा है ? मुझे कुछ समझ में क्यों नहीं आ रहा है? अगर काटता तो दुकता ना ? लेकिन मैंने दर्द का अनुभव तो कभी नहीं किया। कहीं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।