
“मम्मी, मैं रात तक वापस आऊँगी, हैकाथॉन है।” आव्या जल्दी-जल्दी बैग पैक करते हुए बोली।
मम्मी ने चिंतित होकर पूछा-
“इतनी रात तक? वहाँ सब लड़के ही होंगे ना?”
आव्या मुस्कुराई-
“कोड में लड़का-लड़की नहीं होता मम्मी, बस दिमाग़ होता है।”
रात 2 बजे, मम्मी ने फोन किया-
“बेटा, सब ठीक है ना?”
आव्या ने हँसते हुए कहा-
“हाँ मम्मी, बस आख़िरी राउंड चल रहा है। अभी फ़ोन रख रही हूँ।”
सुबह टीवी पर ख़बर आई- “नेशनल टेक हैकाथॉन की विजेता टीम की लीडर बनी 21 साल की आव्या।”
मम्मी ने तुरंत व्हाट्सऐप खोला।
आव्या का नया स्टेटस लगा था:
“कुछ लोग पूछते हैं- लड़कियाँ क्या कर सकती हैं?
आज हमने जवाब कोड में लिख दिया।”
