
● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
मोक्षदायिनी नर्मदा अपने सुरम्य सौंदर्य और पाप नाशिनी स्वरूप में कलयुग में विद्यमान है और इसके तटीय साम्राज्य में अनगिनत शिव तीर्थ हैं, जो ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं।
ऐसे ही तीर्थों में एक तीर्थ मध्यप्रदेश में नर्मदा के उत्तर तट पर निमाड़ क्षेत्र में खरगोन जिले के बड़वाह से लगभग 7 किमी दूर सनवाद मार्ग में पुल से पूर्व ही बेलसर गाँव में स्थित अति प्राचीन विमलेश्वर एवं चंद्रेश्वर महादेव मंदिर है।
निःसंदेह पथरीले रास्तों से जब श्रद्धालु अपनी आस्था की गगरी भरकर भगवान शिव का अभिषेक करने जाते हैं तो वह आत्मिक शांति और विमलता को प्राप्त करते हैं।
विमलेश्वर के शाब्दिक अर्थ यानी ‘विमल’ (निर्मल/पवित्र) + ‘ईश्वर’ (स्वामी), अर्थात् वह ईश्वर जो स्वयं निर्मल और पवित्रता प्रदान करने वाले हैं, अर्थात् ‘पवित्रता के देवता’, ‘निर्मल ईश्वर’ या ‘शुद्ध भगवान’ हैं, में ही तीर्थ महात्म्य निहित है।

श्रीमद नर्मदारहस्यम ग्रंथ के सत्तावनवें अध्याय में विमलेश्वर तीर्थ की व्युत्पत्ति के बारे में वर्णन उपलब्ध है। इसी के साथ स्कन्द पुराण के भाग नर्मदा पुराण और वायु पुराण में भी विमलेश्वर तीर्थ का वर्णन प्राप्त होता है।
पौराणिक कथा अनुसार जब पांडवों द्वारा किसी अभक्ष वस्तु का सेवन करने से शरीर में पीड़ा होना आरम्भ हुई, तब उस पीड़ा से मुक्ति के लिए मार्कण्डेय ऋषि ने युधिष्ठिर से कहा- ‘हे युधिष्ठिर। इसके बाद विमलेश्वर तीर्थ जाना चाहिए। यह तीर्थ नर्मदा के उत्तर तट पर स्थित है। वहाँ स्वयं दिव्य देव शिला है। वहाँ स्नान कर जो भक्त महेश्वर की पूजा करते हैं, वे पापों का नाश कर परम पद पाते हैं। तीर्थ पर ब्राह्मण भोज करवाने से सहस्त्र ब्राह्मण भोज का फल मिलता है और धन धान्य प्राप्त होते हैं और सब निधियों अक्षय हो जाती हैं। यहाँ प्राण त्यागने से प्रलय पर्यन्त रुद्रलोक का वास मिलता है। ऐसे कई पौराणिक आख्यान विमलेश्वर तीर्थ की महिमा का स्तवन करते हैं।
भीम ने स्थापित किया विमलेश्वर शिवलिंग
वर्तमान में विमलेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना कुन्ती पुत्र भीम ने की थी। इस तरह यह मंदिर का इतिहास पांडवकालीन होने का प्रमाण है।
ग्राम के नाम को लेकर भी धारणा है कि विमलेश्वर का अपभ्रंश बेलसर के रूप में हो गया। इसके साथ ही मंदिर जिस पहाड़ पर स्थित है, वह ॐ के आकार का है।

चंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी है ऐतिहासिक

विमलेश्वर मंदिर के ठीक पास पहाड़ी पर चंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी स्थापित है। इस मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी है और ढाई मन का अष्टधातु का घंटा श्रद्धालुओं सहित आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यह घण्टा नेपाल की महारानी ने लगवाया था। कहा जाता है कि नेपाल की महारानी चन्द यहाँ से गुज़र रही थीं। इसी दौरान उन्होंने इसी नर्मदा तट पर भगवान शंकर से पुत्र कामना की थी। मनोकामना पूरी होने पर सन् 1915-1916 (संवत 1972) में यहाँ ढाई क्विंटल का अष्टधातु का घंटा भेंट किया था। बताया जा रहा है कि उस समय हाथी पर रखकर नेपाल से घंटा मंदिर में लाया गया था। और इसी मान्यता के चलते विमलेश्वर और चंद्रेश्वर मंदिर में अधिकांश महिलाएँ पुत्र प्राप्ति की कामना को लेकर भी आती हैं। चंद्रेश्वर मंदिर के बाहर एक प्रतिमा स्थापित है, जो प्रथम दृष्टया हनुमान जी की प्रतिमा नज़र आती है पर वह सिंदूर से शृंगारित प्रतिमा हनुमानजी की नहीं होकर द्वारपाल जी की है।

गुफ़ाएँ और जलकुण्ड भी स्थित है इस तीर्थ से
मान्यता है कि मंदिर के निकट दो गुफ़ा हैं, जो ओंकारेश्वर व मांडव तक जाती हैं। इसी क्षेत्र में दो जल कुंड भी हैं। इनके बारे में धारणा है कि यहाँ स्नान से चर्म रोग दूर होते हैं। विमलेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई के शासनकाल में हुआ, तभी से पुजारी को नियुक्त कर जीवनयापन के लिए कृषियोग्य भूमि भी दी गई है।

बेलसर में हैं तीन आश्रम
ग्राम बेलसर नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर है। यहाँ दो आश्रम में जिनमे रेवा धाम आश्रम, और बर्फानी आश्रम में नर्मदा परिक्रमा करने वाले परिक्रमवासियों के लिए ठहरने और भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था आश्रम संचालक करते हैं। तीसरे आश्रम रामेश्वर धाम मे नर्मदा मंदिर स्थित है।

बेलसर में आयोजित होते हैं दो उत्सव
विमलेश्वर तीर्थ ग्राम् बेलसर में होने से ग्रामवासी और ग्राम् पंचायत मिलकर दो वार्षिक उत्सव मनाते हैं,एक महाशिवरात्रि पर,जिसमें लगने वाले विशाल मेले में आसपास के हजारों लोग सम्मिलित होते हैं, दूसरा उत्सव देवउठनी ग्यारस के बाद आरम्भ होने वाली पंचक्रोशी यात्रा का एक पड़ाव विमलेश्वर तीर्थ में होने के कारण उस दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है।

कैसे पहुँचें विमलेश्वर तीर्थ?
नर्मदा की सुरम्य लहरों के सुंदर तट पर स्थित विमलेश्वर तीर्थ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्र है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर के बहुत समीप है और देश के अन्य शहरों और कस्बों के बीच परिवहन के विभिन्न साधनों के माध्यम से सुगम संपर्क है।
हवाई मार्ग से: विमलेश्वर और ओंकारेश्वर से निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्या बाई होलकर हवाई अड्डा (इंदौर) है, जो 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, श्रीनगर, रायपुर, लखनऊ, पुणे, पटना, वडोदरा आदि भारत के कई शहरों से जुड़ा हुआ है।
रेल द्वारा: वर्तमान में ओंकारेश्वर का अपना रेलवे स्टेशन नहीं है। ओंकारेश्वर से निकटतम ब्रॉड गेज रेलवे स्टेशन खंडवा रेलवे स्टेशन है, जो 77 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खंडवा रेलवे स्टेशन भारत के विभिन्न शहरों और कस्बों से जुड़ा हुआ है। इतनी ही दूरी पर इन्दौर जंक्शन भी समीप है।
सड़क मार्ग से: ओंकारेश्वर-विमलेश्वर को राज्य और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली विभिन्न और नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। ओंकारेश्वर से सबसे लोकप्रिय बस गंतव्यों में उज्जैन, खंडवा, खरगोन और इंदौर शामिल हैं।
विमलेश्वर तीर्थ जाने के लिए सड़क मार्ग से निजी वाहन से भी बड़वाह से पहुँचा जा सकता है अथवा बस से बड़वाह उतरकर वहाँ से रिक्शा आदि विमलेश्वर (बेलसर) के लिए उपलब्ध है।

#डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
लेखक एवं पत्रकार, इन्दौर
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