
भावों को आकार देती कविता,
शब्द भाव से बनती सरिता।
परिवेश संग कल्पना से,
बहती शब्द गंगा।
जहां न पहुंचे रवि !
वहां वहां कवि पहुंचता ।
कवि अपनी लेखनी सहारे
गागर में सागर भरता।
एक पग जमीं दूजे पग अंबर,
शब्द भाव चलते चलता।
शब्द भाव की सरिता में,
गंग जमुन संगम दिखाता।
अपनी कलम से कविवर तो,
जीवन मंत्र को देता
#सीता गुप्ता, दुर्ग,छत्तीसगढ़

