वैचारिक महाकुंभ

यातना गृह..!

  यह पुरानी हवेली उसके लिये यातना गृह से कम नहीं है..मानों किसी बड़े गुनाह के लिये आजीवन कारावास की  कठोर सजा मिली हो ..  ऐसा दंड कि ताउम्र इस बदरंग हवेली के चहारदीवारी के पीछे उस वृद्ध को सिसकते ...

Read More

सतयुग से कलयुग

सतयुग से कलयुग है आया,क्यों दशा न बदली युग बीते , नारी  सदियों से  है  अबला , वेदों  के कथन  सभी  रीते। देवी  तो मात्र  दिखावा है , झुकता जग नहीं ,झुकाता है , पल पल पर मौन परीक्षा दे,परिणाम दुखी कर जाता ...

Read More

यादों का महीना

मधुर मिलन का है महीना। कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का है महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नबेली दुल्हन को, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबो में डूबी रहती है, दिन रात सताती याद उन्हें। होती रिमझिम वारिश जब भी, दिल में उठती तरंग अनेक। पिया मिलन ...

Read More

फिर मेरी हँसी से अपनी तस्वीर रँगते क्यूँ हो

मुझे भुला दिया तो रात भर जागते क्यूँ हो मेरे सपनों में दबे फिर पाँव भागते क्यूँ हो एक जो कीमती चीज़ थी वो भी खो दी अब बेवजह इस कदर दुआ माँगते क्यूँ हो इतना ही आसान था तो पहले बिछड़ जाते वक़्त की ...

Read More

खुशी हो या गम नशा का सेवन क्यों 

पर्व-त्योहारों या गम को दूर करने के लिए अथवा विभिन्न सामाजिक पार्टीयों में विशेषकर फब पार्टीयों में नशीली पदार्थो जैसे शराब सिगरेट आदि का प्रचलन बढ़ रहा है और इसे बुराई के तौर पर देखने की प्रवृत्ति प्रायः कमजोर हुई ...

Read More

आओ ! बनाएं शांति धाम

आओ! दुनियावालों कुछ हम भी आज बच्चों से सीख लें। मिठास मुस्कान से विभोर कर दें हर शत्रु को, बंदूक उठाने की बजाए फूल हाथों में लेकर स्वागत की जयमाला पहनाएँ। ताकि हर कोई समझें हम स्वस्थ मष्तिष्क के जीव श्रेष्ठ मानव है। एक-दूसरे के बैर भाव मिटाकर दुनिया को एक बनाएँ, जहाँ महकेंगे सदा कुसुम सुगंधित वन शेर ...

Read More

वक्त

 nir मौत  ने  भी  अपने  रास्ते बदल डाले, मैं जिधर चला उसने कदम वहाँ डाले। जब - जब लगा मेरे जख्म भरने लगे, पुराने वक्त की यादों ने फिर खुरच डाले। मैं बहुत परेशान था पैरो के छालों से, मंजिल ने फिर भी रास्ते बदल डाले। रौशनी ...

Read More

सृजन !

पुलकित कंपित चातक गाये ! गुंजित बादल विपुला छाये !! उमड़ घुमड़ कर अंबर घेरा ! श्यामल गर्वित रूप घनेरा ! अम्बुद घोर हुआ अंधेरा ! दमक दामिनी डाला डेरा ! गगरी प्रेम सुधा भर लाये ! गुंजित बादल विपुला छाये !! चिर संचित चित चंचल छाया ! मन ...

Read More


Custom Text

  • लेखक दीर्घा matrubhasha
Custom Text

मातृभाषा को पसंद कर शेयर कर सकते है