वैचारिक महाकुंभ

गहरा दर्द

हाथ-पैर में लगे जो काँटा, वो तो सबको दिखता है | पर जो"अंतस"में चुभा है, वो न किसी को दिखता है | रह -रहकर जो टीस है देता, दिल कितना फिर रोता है | "अंतस " में उस चुभे काँटे का, दर्द नहीं कोई देखता है | हाथ ...

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सनद रहें ! देश में आम चुनाव है…

अफरा-तफरी का दौर शुरू हो गया, आवाजाही पर संदेह शुरू है, बैण्ड बाज़ा बारात भी तैयार है, हर तरफ चुनावी शौर है, वादों की बौछार है, कोई पिछले 70 सालों के हिसाब दे रहा है तो कोई पाँच सालों की ...

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समय

"नाऊ ठाकुर राम-राम"... आगंतुक ने अपनी छड़ी ठुड्डीयों पर टिकाकर पड़ी बेंच पर बैठते हुए अपने आने का संकेत दिया... राम- राम साब जी! जमुना ने बाल काटते हुए ही प्रत्युत्तर किया। 'ये तो अपने कलेक्टर साहब है' उनपर नजर पड़ते ...

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एक राष्ट्र पुरुष का यूं अचानक चले जाना

एक बार एक कार से स्कूटर की टक्कर हो गई। जो नौजवान कार चला था बाहर निकलकर स्कूटर वाले को गुस्से में बोला...'मैं गोवा के पुलिस कमिश्नर का बेटा हूँ'...स्कूटर वाले ने मुस्कुराते हुए कहा...'मैं गोवा का मुख्यमंत्री हूँ...' ऐसे ...

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होली पर बाल कविता

छोटे-छोटे बच्चो ने होली पर बनाई है अपनी एक टोली। पानी से पिचकारी भर ली और रंगों से भर ली है झोली।। पानी से गुब्बारों को भरकर आज मनाएंगे सब होली। भीगे मुन्नी,भीगे मुन्ना,नाच नाच कर सब बच्चे खेले होली।। छोटे-छोटे बच्चो के संग ...

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आज करें हुड़दंग

होली है भई होली है , आज करें हुड़दंग । चलो साथ ले पप्पू को भी , खूब लगायें रंग ।। मोहक रंग - रंगीला टोली , लेकर घर - घर जायें । नहीं किसी से बैर करें हम , सबको मित्र बनायें ।। रंग प्यार का बरसायेंगे ...

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जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की

होली बसंत ऋतु में मनाया जाने वाला रंगों का पावन पर्व है. फाल्गुन माह में मनाए जाने की वजह से इसे फागुनी भी कहा जाता है. देश भर में हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है. म़ुगल शासनकाल में ...

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होली मरदानी

रंग सजे  सीमा  पर सारे। शंख  बजाए कष्ट निवारे। संकट आतंकी  बन  बैठे। कान  उन्हीं के वीर उमेंठे। राष्ट्र सनेही  भंग  चढ़ालो। शत्रु समूहों को मथ डालो। ओढ़ तिरंगा ले बन शोला। केशरिया होली तन चोला। याद  करे  संसार  रुहानी। खेल सखे होली  मरदानी। चेत सके आतंक न प्यादे। चंग  सखे  ...

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  • लेखक दीर्घा matrubhasha
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