वैचारिक महाकुंभ

दिसम्बर अब जाने लगा है...

अब दिसम्बर भी जाने लगा है, गीत विरह के  गाने लगा है। सहेजा था इसको मैंने दिल में, पर ये मीत दूजा बनाने लगा है। कोई शिकवा नहीं इससे मुझको, रीत दुनिया की है ये पुरानी। है मुसाफिर इनसान जग का, जिंदगी है यहां आनी-जानी। प्यार,उल्फत सभी अच्छे लफ्ज हैं, पर सच में है यह सब कहानी। जिसको भाया उसने ...

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हम भी देखेंगे..

अगर सैलाब उतरा तो किनारा हम भी देखेंगें, तुम्हारे हुस्न का दिलकश नज़ारा हम भी देखेंगें। हटा दो ज़ुल्फ की काली घटा को अपने चेहरे से, चमकती चाँदनी,रौशन सितारा हम भी देखेंगें। जिसे कल तक तुम्हारी चाहतों का ही सहारा था, उसे कैसे किया है बे-सहारा,हम भी देखेंगें। सुना है तीर नज़रों से चलाना तुमको आता ...

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श्याम सरस सुखधाम

तेरे प्रेमी भक्त हैं,कान्हा!कई करोड़। सबके मन से किस तरह,करते हो गठजोड़? मधुबन्ती ब्रजभूमि में,कान्हा मधु का धाम। मधुमय वंशी स्वर सरस,मधुमय राधा नाम॥ रुदन देती कभी,देती हँसी ललाम। कान्हा!तेरी बाँसुरी,गूंज रही अविराम॥ छोड़ गए ब्रज में रुदन,पीड़ा,व्यथा अनंत। कहो द्वारिकाधीश! कब,होगा इनका अंत ?॥                           ...

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कहीं सांपनाथ,तो कहीं नागनाथ

महाविद्यालय चाहे तो स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम भी शुरू कर सकता हैl राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ही अब चिकित्सा महाविद्यालय की मान्यता देगा,हर साल चिकित्सा महाविद्यालय को नवीनीकरण हेतु चिकित्सा परिषद् में चक्कर न लगाकर यह आयोग भी मामलों को देखेगाl हर वर्ष का निरीक्षण ख़त्म कर दिया गया है,अब हर दिन ऑनलाइन नजर होगीl ४७९ चिकित्सा महाविद्यालय में से ३५० ऑनलाइन जुड़ चुके हैंl अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ...

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tarkesh ojha

बड़े-बड़ों की शादी और बीमारी...!!

पता नहीं,तब अपोलो या `एम्स` जैसे अस्पताल थे या नहीं, लेकिन बचपन में अखबारों में किसी किसी चर्चित हस्ती-खासकर राजनेता के इलाज के लिए विदेश जाने की खबर पढ़कर मैं आश्चर्यचकित रह जाता था। अखबारों में अक्सर किसी-न-किसी बूढ़े व बीमार राजनेता की बीमारी की खबर होती थी। साथ में ...

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लक्ष्य

संघर्ष सतत करते जाना, कभी न तुम थक जानाl जीवन के लक्ष्य पर तुम, निरन्तर आगे बढ़ते जानाl परमात्मा को साथी बना लो, पथ का उसे सारथी बना लोl राह आसान करते जाना, सफलताओं को पाते जानाl मंजिल बिल्कुल दूर नहीं है, कठिनाई जरा भी नहीं हैl विकारों को छोड़ते जाना, पवित्रता अपनाते जानाl स्वर्णिम लक्ष्य मिल जाएगा, विश्व परिवर्तन हो जाएगाll     ...

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चिड़िया रानी

चिड़िया रानी बड़ी सयानी, अपने मन की हो तुम रानी। छोटे-छोटे पैरों से तुम, फुदक-फुदक कर चलती हो। जाँच-परख कर अच्छे से, फिर चोंच से दाना चुगती हो। बड़ी गजब की फुर्तीली हो, चंचल कोमल शर्मीली हो। कभी घास पर-कभी डाल पर, चीं-चीं करती फिरती हो। खुले गगन में पंख पसारे, करती रहती हो मनमानीl चिड़िया रानी चिड़िया रानी, अपने मन की हो ...

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ध्येय बना चलना होगा

जीवन के इस हवन कुण्ड में, इच्छाओं की आहुतियाँ दे अहंकार अर्पण करके ही, राह मोक्ष की होती हासिल। पग पथरीले पथ से  घायल, या तूफानों के साए हो हिम्मत नहीं हारते जो जन, आखिर पाते हैं वो मंजिल॥ जीवन के अनवरत सफ़र में, निश्चित आएंगी बाधाएँ दिशाभ्रमित करके हमको नित पथ भटकाएगी बाधाएँ। लेकिन हमको लिए हौंसले, ध्येय बनाकर चलना होगा दिशाभ्रमित करती ...

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  • लेखक दीर्घा matrubhasha
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