वैचारिक महाकुंभ

अंतरात्मा

अंतरात्मा जो कहे वही कीजिए काम सबसे बड़ा जज वही वही बसे है राम अंतरात्मा में झांककर पहचान लीजिए स्वयं को सबसे बड़ा दर्पण वही वही बसे है चारो धाम माता पिता लौकिक जिनके खुश रहते सुबह शाम अलौकिक पिता परमात्मा बनाते उनको ही महान। #श्रीगोपाल नारसन परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ ...

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अंग्रेजीः जूती को पगड़ी बनाया 

अंग्रेजी अखबार ‘मिंट’ में छपे आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के सिर्फ 6 प्रतिशत लोग किसी तरह अंग्रेजी बोल लेते हैं। अंग्रेजी को सिर्फ ढाई लाख लोगों ने अपनी मातृभाषा लिखवाया है। वास्तव में इन ढाई लाख लोगों ...

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चलो कुछ पहल करते हैं

चलो कुछ पहल करते हैं हसीन कुछ पल करते हैं साथ तुम्हारा हमारा रहे मुश्किलें बड़ी,हल करते हैं हाथ एकदूजे का बटाकर खड़ा कोई महल करते हैं जिंदगी में कुछ उबासी सी है चलो कुछ बदल करते हैं यू गुमसुम होना ठीक नहीं मन अपना जरा चंचल करते हैं लबों ...

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माँ

माँ से बिटियाँ का स्नेह होता है लाजवाब बिटियाँ को सुलाती अपने आँचल में लगता है जैसे फूलों के मध्य पराग हो झोली में । माँ की आवाज कोयल सी और बिटियाँ की खिलखिलाहट पायल की छुन -छुन सी लगता है जैसे मधुर संगीत हो फिजाओं में । माँ ...

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मोहब्बत दिल से होती है

मोहब्बत सूरत से नहीं होती है। मोहब्बत तो दिल से होती है। सूरत खुद प्यारी लगने लगती है। कद्र जिनकी दिल में होती है।। मुझे आदत नहीं कही रुकने की। लेकिन जबसे तुम मुझे मिले हो। दिल कही और ठहरता नहीं है। दिल धड़कता है बस आपके ...

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गमला भर मिट्टी

विकास आज बेहद खुश था, क्योंकि उसके गमले में आज हरी हरी  और नन्हीं नंन्ही पत्तियां आ चुकी थीं। .. दस साल के विकास.ने आठ दस दिन पहले ही कटी हुई सब्जी के कचरे में से कुछ बीज अलग करके छोटे ...

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रोटी को अमेरिका-जापान घुमाया जाता है

रोटी को भी बहलाया फुसलाया जाता है जब आग के दामन से उसे बचाया जाता है रोटी प्रजातंत्र का बहुत शातिर खिलाड़ी है तभी तो इसे भरे पेट में खिलाया जाता है झुकोगे,गिरोगे,तरसोगे और कलपोगे भी जब रोटी का अभिमान दिखाया जाता है तुम्हारी गरीबी का ...

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कवि हो तुम

गौर से देखा उसने मुझे और कहा लगता है कवि हो तुम नश्तर सी चुभती हैं तुम्हारी बातें लेकिन सही हो तुम कहते हो कि सुकून है मुझे पर रुह लगती तुम्हारी प्यासी है तेरी मुस्कुराहटों में भी छिपी हुई एक गहरी उदासी है तुम्हारी खामोशी में भी सुनाई ...

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  • लेखक दीर्घा matrubhasha
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