वैचारिक महाकुंभ

सत्य पथ

तनिक नही भयभीत मैं अविचल खड़ा अटल हूं। न हार में न जीत में मैं सत्य पथ पर प्रशस्थ हूं। नही बदले मेरे विचार नही मांगा कुछ अधिकार अपने संस्कार पर आबद्ध हूं अटल अविचल अडिग हूं सम्मान देश का मुझे चाहिए जननी धरा का अभिमान मुझको चाहिए। मिट्टी से ...

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अभिषेक औदीच्य श्रेष्ठ समीक्षाधीष से हुये सम्मानित

साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा 25 अप्रैल 2019 को दैनिक विषय रामायण पर सारगर्भित प्रस्तुति न सिर्फ पटल को सुहागा किये बल्कि चार चाँद लगा दिये पटल दैनिक रामायण विषय पर लगभग 25 से ज्यादा प्रतिभागियों ने अभिव्यक्ति के माध्यम ...

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महापर्व

पूरे गाँव में उत्साह का वातावरण छाया था, चारों तरफ खूब चहल-पहल थी। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, सभी खूब मौज-मस्ती कर रहे थे। कच्चे घरों की दीवारों पर मनमोहक कलाकृतियाँ बनाई गयीं थीं। चबूतरे को गोबर से लीप-पोतकर किरण सुन्दर ...

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हम बहुत कुछ करते हैं दिखाने को

हम बहुत कुछ करते हैं दिखाने को। हाथों की लकीरों को आजमाने को। न सुबह को चैन है न रात को आराम, हाय ये क्या हो गया इस जमाने को। जिंदगी की परेशानियां कम हो जाए, हम चल दिए बुत के आस्ताने को। दिल में जख्म ...

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वुमन आवाज --2(समीक्षा)

पुस्तक----- वुमन आवाज --2 संपादक ---- शिखा जैन समीक्षा --- आरती प्रियदर्शिनी  इंदौर के संस्मय प्रकाशन के अंतर्गत शिखा जैन के कुशल संपादन में प्रकाशित पुस्तक "वुमन आवाज-2" अनेकों महिलाओं की कृतियों से सुसज्जित एक बेहतरीन पुस्तक है। पुस्तक के हर पन्ने पर ...

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हम मिले दर्द को छिपा कर के

हम मिले दर्द को छिपा कर के क्या मिला उनसे यूँ वफ़ा करके याद करते है वो भुला कर के फिर बुलाते है वो दुआ कर के पल दो पल की इस ज़िन्दगी में तुम जीत लो दिल यूँ मुस्कुरा कर के हाथ को हाथ में ...

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रामायण

रामायण की सुनिए वाणी। पाप मुक्त हो जाता प्राणी। रहमत की आधार सिला ये, जन-जन की ये कल्याणी।।१ सतियों की है अमर कहानी। गाथाओं की है भरी रवानी। विपदाओं को ये दूर हटाकर, छोड़ी अपनी अलग निशानी।।२ सुख-दुख की विपदाये झेले। प्राणी बनकर भगवन खेले। परम विवेकी मानव जीवन, नीर अजब ...

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भारत में भाषा का मसला - (२)

भारत के हित में देश के भाषा प्रेमियों को अपने-अपने आग्रह छोड़ देना चाहिए क्योंकि अंग्रेजों की "फूट डालो राज करो" की नीति का यही एकमात्र तोड़ है और यही न्यायपूर्ण भी है। हिन्दी शक्तिशाली भाषा है क्योंकि वह देश के ...

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  • लेखक दीर्घा matrubhasha
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