महंगी दावत

14
9 0
Read Time5 Minute, 0 Second

atul sharma

एक पार्टी में हम घूम रहे थे,
खाली जगह को ढूँढ रहे थे।
भीड़ से हर मेजबान घिरा था,
मैं ही एक ऐसा सिरफिरा था।
जो भीड़ से इतनी दूर खड़ा था,
मन मेरा भी दावत में पड़ा था।

एक टिक्की का दसों हाथ स्वागत करते,
तब टिक्की किसी एक का मान बढ़ाती।
टिक्की पाकर जो बाहर निकल जाता,
भाग्यशाली विजेता वह खुद को पाता।
बाकी नौ अपनी हार स्वीकार करते हैं,
इंतजार अगली टिक्की का करते हैं।
टिक्की दम तोड़ती गई,हाथ बढ़ते गए,
लोग नए-नए हथकंडे यूँ ही गढ़ते गए।

उधर देखें दाल की कैसी लीला है,
कमजोरी में उसका रंग भी पीला है।
मरीजों की हितैषी मूंग की दाल,
पार्टी में सरपट थी दाल की चाल।
दर्द देख दाल का,मक्खन पिघल जाता है,
बेदर्द इंसान उसे,यूँ ही निगल जाता है।
दाल मक्खन की यारी तो जगजाहिर है,
मक्खन दाल में घुसने में माहिर है।
मैंने क्षण भर को अपनी पलक झपकी, उधर दाल पर कुछ लोगों ने मारी लपकी। तभी एक घटना का उदय हुआ, मैं न समझा कि क्या हुआ।थप्पड़ और घूँसों की बौछार हो गई, लातों का प्रयोग शायद मजबूरी हो गई। तभी कुछ ऐनकधारी वहाँ आए, उग्र युवा कुछ यूँ समझाए। पार्टी में कुछ-कुछ हो जाता है, किसी का कोट गन्दा भी हो जाता है। तभी पिटा अपराधी स्वतंत्र सांस लेने लगा, रो-रो दाल गिरने की मजबूरियां गिनाने लगा। पिटे मेहमान के तो फिर दर्शन नहीं हुए, गन्दे कोट वाले,मेरे पास आ खड़े हुए। काश ये बुद्धि इन्हें पहले आई होती, तो ना कोट बिगड़ता ना लड़ाई होती।

तब गोल गप्पे की मेज को मैंने देखा,
और भीड़ की लालायित दृष्टि को देखा।
है उपनाम गोल गप्पे का बताशा,
जो कुछेक को देता खुशी- कुछेक को हताशा।
कुछ मीठा बताशा मांगते,कुछ खट्टा,
बताशे की आस में,सभी थे इकट्ठा।
मुझे सोंठ लगा के देना,मुझे खटाई,
मुझे चना,मुझे आलू ऐसे में एक आवाज आई।
मुझे एक ही बताशे में,सारी चीजें भर दे,
जो मेरी सारी इच्छाओं को पूरा कर दे।
तभी गप्पा स्वामी ऊँचे स्वर में बोला,
आत्मविश्वास से उसका तन- मन डोला।
एक बताशे में सारी चीजें भर दूंगा,
बशर्ते बताशे का आकार बड़ा कर दूंगा।
मुझे तो आपके श्रीमुख का नक्शा चाहिए,
और उसकी मारक क्षमता का अंदाजा चाहिए।
या फिर आप थोड़े इन्तज़ार का मजा लीजिए,
अपनी इच्छापूर्ति हेतु थोड़ा इन्तज़ार कीजिए। खट्टा पानी,मीठा पानी केवल पानी हो जाएगा,
चना,सोंठ,आलू का इसमें मिश्रण हो जाएगा।
उस चरणामृत का जब आप पान करेंगी,
आत्माएं तृप्त हो आपका धन्यवाद करेंगी।

ऐसी तो हर मेज पर लाचारी और आफत थी,
ये किसी पैसे वाले की दावत थी।
वरना साफ जगह पर बिछी चटाई होती,
पत्तल पर सब्जी,पूड़ी और मिठाई होती॥

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl 

matruadmin

Average Rating

5 Star
100%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

14 thoughts on “महंगी दावत

  1. लिखते रहिये कविताएँ,भारतीय संस्कार के उजड़ते हल बयान करते रहिये। कभी तो समाज सुधरेगा।

  2. बहुत बहुत धन्यवाद, आपका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहे।

  3. सभी दर्शकों को पसंद आई यह कविता। इसके लिए आप सबका बहुत बहुत आभार।

  4. अम्मा ककी दो अंगुलियाँ नामक कविता लिखी है उसमें समाज की समस्याओं पपर कटाक्ष किया है। आप पढ़ें

  5. समाज में जागरूकता पैदा करना, कवि का धर्म है

  6. जय हिंदी साहित्य ,
    जय हिंदी ,
    जय हिंदुस्तान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मां

Wed Dec 6 , 2017
आज एक प्यारी-सी माँ मिली, देखते ही उसे मेरी बांछें खिली। लगा जैसे लौट आई हो वह, इस प्यारी-सी माँ के स्वरूप में। दरअसल माँ,माँ ही होती है, चाहे मेरी माँ हो या उसकी। माँ का कोई मजहब नहीं होता, न ही होती उसकी कोई जात। माँ का कोई रंग […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।