आज का दिन बहुत ही पवन है इस दिन हर जाती धर्म के लोग इस त्यौहार को अपने अपने तरीके से मानते है / पर हर एक का मानना वो ही है जो जग जाहिर है / की दीप जलाकर सिर्फ खुशियों को जाहिर करे और भाई चारे तथा साद भावनाओ की ज्योत हर एक इन्सान के दिल में दीप की तरह जलाऊ / और अपनी ख़ुशी इजहार करू /
साथियो अनेको मान्यते है इस त्यौहार को मानाने की परन्तु सभी का उद्देश्य सिर्फ एक ही है की अपने और अपने परिवारों की खुशियों का उत्सव मनाये और अमन शांति और भाई चारे के साथ आपस में रहे / जिस तरह की दीया की रोशनी सभी को अन्धेकार से निकल कर प्रकाश देती है वैसे ही हम सब लोगो को अपनी सिर्फ खुशिया ही लोगो में बताना चाहिए न की अपने गमो को / शायद आप को पता होगा की दीपक खुद को जलाकर अपने को कष्ट में रख कर सिर्फ हम सब को रोशनी ही देता है न की कष्ट का एहसास / इसलिए हम सब को सिर्फ स्वच्छय दिल से सिर्फ दीप जलाकर हर वो ख़ुशी को बताना चाहिए जिस से हर दिल को खुशिया मिले /
इसी त्यौहार का नाम है दीपावली /
#संजय जैन
परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
Mon Nov 12 , 2018
खुदा के फजल से अच्छी-खासी गृहस्थी चल रही थी, पर जब से यह मी टू का वायरस शुरु हुआ है तब से दिल में तूफान मचा पड़ा है। मुझे अपने कालेज के वो पुराने दिन याद आने लगे जिनकी सुनहरी यादें सीने में दफन थी। वैसे कालेज के दिनों में […]