हर किसी को नहीं मिलता सच्चे अच्छे लोगों का साथ। ये दुनियाँ बड़ी जलीम है जो किसीको नहीं छोड़ती। किये अच्छे कर्म तुमने तो उसके अच्छे फल मिलेंगे। जिंदगी के सफर में तुझे जीने के मकसद मिलेंगे।। जो जन्म लेता है दुनियाँ में उसे मरना भी पड़ता है। जीना मरना […]

इंसान की गलतियों का फल भोग रहे हम। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा।। विश्वगुरु बनने के चक्कर में दो देश में छिड़ गई जंग। बाकी पीछे पीछे हो लिए देकर अपना समर्थन। सबके लिए मिला है अब ये प्रसाद बराबर।। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा। इंसान की गलतियों […]

यू जिंदगी की उलझनों में हम उलझते चले गये। न जीने की चाह है और न मरने का डर। यू जिंदगी की उलझनों में हम उलझते चले गये।। घर से निकले थे हम तो खुशियों की तलाश में..२। गम राह में खड़े थे वो ही साथ हो लिए..२। यू जिंदगी […]

“माता दिवस पर मेरी रचना सभी पुत्रो की ओर से अपनी अपनी माताओं के चरणों में समर्पित है” एक अक्षर का शब्द है माँ, जिसमें समाया सारा जहाँ। जन्मदायनी बनके सबको, अस्तित्व में लाती वो। तभी तो वो माँ कहलाती, और वंश को आगे बढ़ाती। तभी वह अपने राजधर्म को, […]

जिंदगी कितनी मिली ये कभी मत सोचो। जिंदगी में क्या कुछ तुम्हें मिला ये सोचो। जिंदगी मिली है तुम्हें कुछ करने के लिए। इसे तुम यूही मत बिना वजह के गवाओं।। जिंदगी को तुम समझो और इसका मनन करो। फिर मायाने जिंदगी के लोगों के जहन में बैठाओं। कर सके […]

सिक्कों की खनक पर सोने की चमक पर बांट दिए हैं हमने अपनी खुशियों और गमों के तराने। जमीन को ना जाने कितने कदमों में नापकर उसको भी कई नामदार से टुकड़ों में बांट दिया है हमने। अभिव्यक्ति और संवेदनाओं को अवसरवादिता का मुखौटा पहना दिया है हमारे विकसित होते […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।