
नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना हमारा युद्ध है और इसे हमें ही लड़ना है और हमें ही जीतना है – डॉ. निखिल ओझा
इंदौर। साहित्य और सामाजिक जागरुकता को समर्पित शहर की प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच द्वारा नशा निरोधक दिवस के उपलक्ष्य में विशेष मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य विषय ‘नशा करेगा नाश’ रखा गया, जिसके माध्यम से समाज को व्यसन मुक्त बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम श्रुति शर्मा द्वारा सुरमयी सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से आरंभ हुआ।
अध्यक्ष ज्योति जैन ने शब्द-पुष्पों से अतिथियों का स्वागत किया और संस्था का परिचय दिया। उन्होंने नशे की तुलना एक ऐसे धीमे विष से की, जो तन और मन को धीरे-धीरे समाप्त कर देता है। साहित्यकारों को शब्दों और स्वाध्याय का नशा करने की सलाह देते हुए उन्होंने एक स्लोगन के माध्यम से अपनी बात रखी- ‘नशे से जो तौबा कर लेता, परिवार आज यूँ ना बिखरता।’
आयोजन का मुख्य आकर्षण वामा सखियों द्वारा स्वरचित प्रेरक स्लोगन (नारे) लिखकर उनका वाचन करना रहा, जिसका उद्देश्य राष्ट्र तक नशा मुक्ति का सशक्त संदेश पहुँचाना था। साथ ही, नीरजा जैन, अनिता जोशी, सुनीता दुबे और उषा गुप्ता ने सुबह का तारा नामक जीवंत नाटिका की प्रस्तुति कर नशा मुक्ति के मानवीय पक्ष को उजागर किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. निखिल ओझा (व्यसन मुक्ति विशेषज्ञ एवं संस्थापक, नवचेतना नशा मुक्ति केंद्र) थे। कार्यक्रम संयोजकों और सचिव ने स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया।
डॉ. ओझा ने बताया कि ‘नशे की समस्या को मानसिक रोग की श्रेणी में काफ़ी बाद में रखा गया, जबकि यह समाज को शारीरिक और आर्थिक रूप से खोखला कर रही है।’
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, ‘नशे का उपचार कठिन, लंबा और महँगा है, इसलिए हमारा पूरा ध्यान रोकथाम और जागरुकता पर होना चाहिए।’ उन्होंने मोबाइल की लत को भी नशे के समान ही घातक बताया और स्कूली पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति की जानकारी शामिल करने की आवश्यकता जताई।

इस अवसर पर मंच द्वारा दो लेखिकाओं डॉ. गरिमा संजय दुबे व अर्चना मण्डलोई तथा दो यशस्वी पत्रकारों मुकेश तिवारी व डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन शिरीन भावसार ने व आभार वाणी जोशी ने माना। सचिव स्मृति आदित्य ने एक सुखी और सुरक्षित परिवेश के निर्माण के लिए सभी से नशा मुक्ति के संदेश को प्रसारित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित प्रबुद्ध लेखिकाओं ने समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

