आज के दौर का दोस्तो क्या हाल है। आधुनिकता के नाम पर बेशर्मी का ये दौर है। न अदब न शर्म और न ही बची संस्कृति और सभ्यता। इसे ही कहते है लोग आज की आधुनिकता आज की आधुनिकता….।। इसलिए संजय लिखता और कहता मंच से। कि कलम की स्याही […]

सुनो सुनती हूँ देश की कहानी। जिस में सबसे बड़ी समस्या है जनसंख्या बृध्दी। जिसके कारण देश की व्यवस्था लड़ खड़ा जाती है। बचानी है अर्थ व्यवस्था तो जनसंख्या पर नियंत्रण करना पड़ेगा।। करो पालन परिवार नियोजन के तरीको का। और पहला बच्चा लोगो जल्दी नहीं। और दूसरे में अंतर […]

मेहनत लगन और निष्ठा का फल क्या मुझे मिलेगा। बनाया है जो आशियाना क्या उसमें रहने को मिलेगा। या ये भी एक यादगार और स्मारक बनकर खड़ा रहेगा। जो मोहब्बत की कहानी को अपने अंदाज में कहेगा।। महफ़िल में रंग हम जमाते थे। जब वो हमारे साथ होते थे। हम […]

लगता है हमारा आपका साथ बस यही तक था। आप अपने आप को बहुत व्यस्त समझते हो। और सामने वाले को अपने से कम समझते हो। जबकि सामने वाला व्यस्त होते हुये भी दोस्तो से मिलता है। हमारी और तुम्हारी सोच में यही बहुत बड़ा फर्क है। इसलिए दोस्त आप […]

सीने से लगाकर तुमसे बस इतना ही कहना है। की मुझे जिंदगी भर तुम अपनी बाहों में रखना।। मेरी साँसों में तुम बसे हो दिलपे तुम्हारा नाम लिखा है। मैं अगर खुश हूँ मेरी जान तो ये एहसान तुम्हारा है…।। मुझे आँखो में हरपल तेरी ही एक तस्वीर दिखती रहती […]

मोहब्बत जो करते है वो अंजाम से नहीं डरते। क्योकिं ये पग पग पर हमारा इंतहान लेती है।। क्या दिलमें तेरे उमंगे है दिलको छेड़ने के लिए। क्या दिलमें तेरे तरंगे है दिलरुबा को प्रेमरस के लिए। तभी तो मधुर गीत गाते है चांदनी रात में मिलकर।। वो आँखों को […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।