अल्लाह बचाए रु मी टू से  

suresh sourabh

खुदा के फजल से अच्छी-खासी गृहस्थी चल रही थी, पर जब से यह मी टू का वायरस शुरु हुआ है तब से दिल में तूफान मचा पड़ा है। मुझे अपने कालेज के वो पुराने दिन याद आने लगे जिनकी सुनहरी यादें सीने में दफन थी। वैसे कालेज के दिनों में मेरा किसी से लफड़ा-वफड़ा नहीं  रहा, हां दो-चार चटकीली-मटकीली तितलियों से मौका पाकर नैन-मटक्का कर लिया करता था। अब दिल में हूक उठ रही है कहीं ऐसा न हो वे नाजनीनें कहीं से टपक पड़े और छाती ठोंक कर कहें यही वह पचास केजी आदमी है, जो आंखें फाड़-फाड ़कर हमारे आस-पास भंवरे की तरह घूमता रहता था। खैर! ये मेरे पूर्व जन्म के पुण्य का संचय है कि अभी तक बीस साल पुरानी  वे तितलियां प्रकट नहीं हुइंर् वर्ना अपनी भी इज्जत का इस दिवाली में दिवाला निकल जाता।

अगर ऐसे ही मी टू का लफड़ा चलता रहा तो अभी पता नहीं और कितने नेता, मंत्री, पत्रकार, अभिनेता सब बेभाव निपट जाएं। जिनकी तस्वीरां और पिक्चरों को देखकर हम जुल्फें संवारा करते थे , अब उनके मी टू मिशन से उतरे सारे कपड़े देखकर घिन आने लगी है। नंगई का यह चरित्र अब थोक भाव से सोशल मीडिया में झोकमझोंक चल रहा है। अभी और कितने आदमियों  का कितने गुलबदनो के द्वारा गुलकंद बनेगा , यह किसी कच्चे लंगोट वाले को नहीं पता, अब सभी कच्चे लंगोट वालो को दिन-रात खप्पर लिए काली-कपाली नजर आने लगी है।  देश में अच्छे दिन तो नहीं आए पर उनके बुरे दिन आने वाले हैं।  अब मैं भी  सावधान हो गया हूं । हर खूबसूरत चेहरा सती, सवित्री का नहीं होता कुछ सूपनखाएं भी सांप-छछूंदर की तरह सोशल मीडिया में छुछुवाती घूम रहीं हैं। पता चले आज मित्रता करो कल वे  चौपाटी पर घूमने के लिए प्रस्ताव भेंज दें और अगर मना करुं तो कहें- अबे! चवन्नी के चिरकुटी लाल नहीं चलोगे तो मी टू का डंडा पेल दूंगी। इसलिए आज से कसम खा लिया है फेसबुक की खूबसूरत हसीनाओं से सौ नहीं हजार कोस दूर । अपनी एक ही मूली पत्तों से भारी है, दूसरी से कौन जान जहमत में डालेगा।

अक्सर बड़े-बड़े अधिकारी और मोटे-ताजे ऊंचे ओहदे वाले नेता मंत्रियों के आगे-पीछे फाइलों की उठा-धरी करने के लिए सेक्रेटरी टाइप की सुंदर फूलझड़ियां छोड़ दीं जातीं हैं। फिर आग और फूस के मेल में, दिलो के खेल में चिंगारी न उठे धुंवा न उठे, असंभव। अब यह चिंगारी कहीं दबा दी जाती है तो कहीं हालातो के साथ समझौता करके खुद-ब-खुद दब जाती है। अब देखना ये है, अमेरिका से आए इस मी टू के वायरस से कितनों की खटिया खड़ी और बिस्तरा गोल होगा, पर यह भी शोध किया जाए कि कहीं कोई सूपनखा किसी भोले-भाले आदमी का लंगोट खींच कर नंगा न कर दे। नंगई का यह अभियान सफाई अभियान की तरह हर गली-कूचे तक पहुंचना चाहिए। तभी यह स्वच्छता अभियान सफल होगा। आमीऩ़!

#सुरेश सौरभ
निर्मल नगर लखीमपुर खीरी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।