काम किसी के आए इंसान उसे कहते हैं, दर्द पराया उठा सके इंसान उसे कहते हैं, दुनिया एक पहेली कहीं धोखा कहीं ठोकर, गिर के जो संभल जाए इंसान उसे कहते हैं। संसार मुसाफिर खाना है सांसों का आना-जाना है, सागर गहरा नाव पुरानी मौजों का आना जाना है, व्यर्थ […]

हीरोइन राज्यसभा में प्रकट हुई,तो लगा वहां की धरा धन्य हो गई। आज सिर्फ एक आई,दूसरी शूटिंग में व्यस्त थी इसलिए आधी दीवारें उदास थीं,लेकिन इस हीरोइन को देखकर बाकी दीवारें नाचने लगीं और प्रसन्नता के साथ मानो गीत गाने लगी,’घर आया मेरा परदेसी,प्यास बुझी इन अँखियन की..अब दिल तो […]

दीपक जलता है, रोशनी के लिए.. प्यार होता है, तड़पने के लिए। दीपक के संग, जलती है बाती.. प्यार के संग, चलती है पाती। तेल,दिया और बाती, आग की लौ से जलते हैं.. अधेरे को दूर कर रोशनी करते हैं। प्रकाश फैलाते, कभी-कभी हवा के.. झोके आ जाते हैं, रोशनी […]

मन में बसंत लिए,प्रेम की तरंग लिए, रोम-रोम देह का,श्रृंगार गीत गा रहा। हिय में छुपा हुआ था,बेसुध मन मयूर, नृत्य करने तीव्रता से,अब मचल रहा। कोयल भी गाने लगी,बाग़ महकाने लगी, आम भी वृक्ष में आने को है,ललचा रहा। उड़ रही अब धूल,खिल गए टेसू फूल, रंगों का त्यौहार,समीप […]

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मैंने खुदा को देखा है.. कभी रोटी बेलते हुए, कभी रोटी सेंकते हुए, कभी हल-बैल के साथ दौड़ते हुए। मैंने खुदा को देखा है, सिर पर थोड़ी-सी धूप लिए.. और माटी में अपनी खोई हुई, तक़दीर को खोजते हुए। मैंने खुदा को देखा है, कभी प्यासे होंठ लिए.. आँखों से […]

सौ अरमान देखे,तब जाकर एक अरमान मिला, उम्मीदों की कश्ती में बहकर वो फरमान मिला। अब क्या घबराना ऐसे इन आंधी और तुफानों से, मौत भी आ जाए तो पलटकर वो जंहान मिला। उम्मीदों का सफर फिर उन्हीं रास्तों पर ले चला, कयामत से गुजरकर तकदीर को, वो ईमान मिला। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।