इंदौर में 30–31 मार्च को साहित्यिक पत्रिकाओं का राष्ट्रीय समागम, देशभर के संपादक होंगे शामिल

इंदौर। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा 30 और 31 मार्च को इंदौर में आयोजित किया जा रहा दो दिवसीय ‘साहित्यिक पत्रिका समागम’ देशभर की साहित्यिक पत्रकारिता से जुड़े संपादकों, लेखकों, शोधार्थियों और प्रकाशन विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने वाला महत्त्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। हिंदी सहित भारतीय भाषाओं की साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के समक्ष बदलते समय में उत्पन्न हो रही चुनौतियों, उनके स्वरूप, सामग्री और भविष्य की दिशा पर गंभीर विमर्श के उद्देश्य से आयोजित यह समागम साहित्यिक जगत में विशेष उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है। अकादमी के अनुसार, इस आयोजन के माध्यम से साहित्यिक पत्रकारिता के समक्ष उपस्थित आर्थिक, तकनीकी और पाठकीय संकटों पर न केवल चर्चा होगी, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी खोजने का प्रयास किया जाएगा।

समागम का उद्घाटन 30 मार्च को प्रातः 11 बजे से होगा, जिसमें ‘देश और समाज के प्रति साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं का दायित्व बोध : वीणा का शताब्दी संदर्भ’ विषय पर विशेष विमर्श आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े विद्वान तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘वीणा’ के संपादक अपने विचार व्यक्त करेंगे। उद्घाटन सत्र में साहित्यिक पत्रिकाओं की ऐतिहासिक भूमिका, सामाजिक चेतना के निर्माण में उनका योगदान तथा बदलते मीडिया परिवेश में उनकी ज़िम्मेदारियों पर विशेष चर्चा अपेक्षित है। इसके बाद आयोजित प्रथम सत्र में पत्रिकाओं के स्वरूप और प्रस्तुति को केंद्र में रखते हुए ‘जो दिखता है वही बिकता है’ विषय पर विमर्श किया जाएगा, जिसमें यह विचार किया जाएगा कि साहित्यिक पत्रिकाओं के कलेवर और लेआउट में आकर्षण की कमी किस प्रकार पाठकों को उनसे दूर कर रही है और उन्हें अधिक पठनीय के साथ-साथ दर्शनीय बनाने की आवश्यकता क्यों है?

दोपहर बाद के सत्रों में समागम का स्वर और अधिक व्यावहारिक तथा बहुआयामी हो जाएगा। ‘थोड़ी हँसी, थोड़ी खुशी’ विषयक सत्र में साहित्यिक पत्रिकाओं में कार्टून और व्यंग्य चित्रों के प्रयोग पर चर्चा होगी, जबकि अगले सत्र में पत्रिका प्रकाशन से जुड़ी प्रशासनिक और आर्थिक प्रक्रियाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें आर.एन.आई. पंजीयन, दृश्य एवं प्रचार निदेशालय से संपर्क, डाक पंजीयन और वितरण व्यवस्था से संबंधित जटिलताओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा। इसी क्रम में सरकारी अनुदान और विज्ञापन प्राप्त करने की प्रक्रियाओं पर भी विशेषज्ञ जानकारी साझा की जाएगी, जो विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर की पत्रिकाओं के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है। दिन के अंतिम चरण में साहित्यिक पत्रिकाओं की घटती प्रसार संख्या और वैश्विक स्तर पर उनके अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट पर चर्चा करते हुए संभावित समाधान तलाशे जाएँगे, जिसके बाद सायंकालीन विशेष सत्र में देशभर से आए संपादक अपनी-अपनी पत्रिकाओं के अब तक के योगदान और अनुभव साझा करेंगे।

समागम के दूसरे दिन, 31 मार्च को, विमर्श का केंद्र साहित्यिक सामग्री की गुणवत्ता, कलात्मक प्रस्तुति और आधुनिक मुद्रण तकनीक पर रहेगा। ‘छपास की भूख के बीच संपादक धर्म का चीरहरण’ विषय पर आयोजित सत्र में पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही रचनाओं के स्तर में गिरावट और संपादकीय मानकों पर पड़ रहे प्रभावों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। इसके पश्चात आयोजित सत्र में साहित्य और चित्रांकन के संबंधों पर विचार करते हुए यह देखा जाएगा कि चित्र और कलात्मक प्रस्तुति किस प्रकार साहित्यिक पत्रिकाओं की सौंदर्यात्मकता और पठनीयता को बढ़ा सकते हैं। दोपहर बाद का सत्र आधुनिक मुद्रण तकनीकों और प्रकाशन के बदलते स्वरूप पर केंद्रित रहेगा, जिसमें नई तकनीकों के माध्यम से पत्रिकाओं की गुणवत्ता, प्रसार और लागत प्रबंधन पर प्रकाश डाला जाएगा।

दो दिवसीय इस समागम का समापन ‘पाथेय’ विषयक उद्यापन सत्र से होगा, जिसमें समागम के निष्कर्षों और भविष्य की दिशा पर समग्र विचार प्रस्तुत किए जाएँगे। आयोजन समिति के अनुसार, इस समागम से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों को संकलित कर साहित्यिक पत्रिकाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज़ तैयार करने की भी योजना है। साहित्यिक पत्रकारिता के समकालीन परिदृश्य में यह आयोजन न केवल संवाद का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के भविष्य को लेकर ठोस रणनीति बनाने की दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।