खुद मुझे कितना रुलाकर चल दिए।
आँख से आँसू बहाकर…चल दिएll
क्यूँ नहीं शिकवा किया हमसे कभी।
गम सभी दिल में छिपाकर चल दिएll
फासले उसने रखे हमसे…सदा।
और हमको ही सुनाकर…चल दिएll
मान लेते गर उन्हें अपना…कभी।
क्या पता पीछा छुड़ाकर चल दिएll
मंजिलें मिलती रहीं आसाँ…किसे।
खार में रस्ते बनाकर…चल दिएll
वो कभी रोते मिले हमको…अगर।
फिर गले उनको लगाकर चल दिएll
चाल टेढ़ी जो चली हमने…कभी।
राह सीधी वो बताकर…चल दिएll
#सुनीता उपाध्याय `असीम`
परिचय : सुनीता उपाध्याय का साहित्यिक उपनाम-‘असीम’ है। आपकी जन्मतिथि- ७ जुलाई १९६८ तथा जन्म स्थान-आगरा है। वर्तमान में सिकन्दरा(आगरा-उत्तर प्रदेश) में निवास है। शिक्षा-एम.ए.(संस्कृत)है। लेखन में विधा-गजल, मुक्तक,कविता,दोहे है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय सुनीता उपाध्याय ‘असीम’ की उपलब्धि-हिन्दी भाषा में विशेषज्ञता है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी का प्रसार करना है।