आप सवाल कीजिए

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देश में राजनीति का स्तर गिर रहा है और राजनेताओं का कद बढ़ रहा है । अब उत्तराखंड को ही ले लीजिए, उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों की फसल ही लहलहा रही है ।पूरा अम्बार सा लग गया है । हर रोज एक नया नमूना मुख्यमंत्री जैसे सम्मानित पद पर बिठा दिया जाता है, ऐसा करने में कहीं यह तो नहीं कि सबके सपने पूरे किये जा रहे हों । लेकिन इन सपनों के मकड़जाल में आम जनता की सांसे तो घुट ही जाएंगी । क्योंकि अब सरकारी पैसा पूर्व मुख्यमंत्रियों की देखभाल में पानी की तरह उलीचा (बहाया) जायेगा और हम सब जानते हैं कि सरकारी पैसा जनता का तेल निकालकर इकट्ठा किया जाता है । खैर इस देश की जनता का यही भाग्य है ।

बात करते हैं देश के सबसे ज्यादा सम्मानित पद की, राष्ट्रपति महोदय जी की… अभी हाल ही में परम आदरणीय बड़ी शानो-शौकत से एक स्पेशल रेलगाड़ी से कानपुर आये । उनके सम्मान में सारे कायदे- कानून ताक पर रख दिये । वो तो भला हो कानपुर की मीडिया का कि समय रहते जाग गई और जनता का बस थोड़ा सा ही तेल निकल पाया, परंतु परम आदरणीय ने एक ऐसा लॉलीपॉपनुमा बयान अपने भाषण में दे दिया कि सोशल मीडिया पर हंसी का पात्र बनना पड़ा । कितना बुरा समय आ गया देश में कि यहां के लोगों ने एक राष्ट्रपति तक का उपहास उड़ा दिया । उन्होंने तो अपना दुख प्रकट किया था कि लाखों की पगार पाकर भी उनका घर नहीं चल पा रहा है । राष्ट्रपति महोदय एक बार सोचते कि इस देश में ऐसे लोग भी रहते हैं जो प्रतिदिन सौ रुपए भी नहीं कमा पाते, ऐसे कीड़े -मकोड़ों का घर कैसे चल रहा होगा ।

सारी दुनिया कोरोना महामारी से लड़ रही थी, तब इस देश का प्रधानमंत्री बंगाल में चुनावी तैयारियों में लगे थे । तमाम ताकत लगाने के बाद बंगाल हार गए और फिर दौर शुरू हुआ कोरोना तांडव का … लाशों का अंबार, सरकारी सिस्टम फेल, सभी जवाबदार व्यक्ति चूहों की तरह बिलों में छिप गये । कहीं किसी का कोई अता-पता नहीं । अगर कोई सक्रिय था तो देश के भीतर पुलिस और देश के बार्डर पर सेना । संसद में रहने वाले अंडर ग्राउंड हो गये, उद्योगपति देश छोड़ सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर गये । साथियों ! सोचो ईश्वर न करे कि किसी दिन हम पर कोई विदेशी दुश्मन देश हमला कर दे और इस देश के जवाबदार देश छोड़ सुरक्षित स्थानों पर भाग जायें… ये संभव है, इसकी पुष्टि कोरोना महामारी ने कर दी है । परन्तु साथियों आप निश्चिंत रहें इस देश की सेना में भारत मां के सच्चे सपूतों की भरमार है । स्वयं शहीद होकर देश के गरीब नागरिकों को बचा लेंगे और नपुंसक नेताओं को भी । परंतु हम आम नागरिकों का भी तो कुछ कर्तव्य है । सारा भार पुलिस-फौज पर भी नहीं छोड़ सकते हैं ।

किसी ने क्या खूब लिखा है- संसद से सवाल न किया जाये तो संसद आवारा हो जाती है । देश के आम नागरिकों यह जान लो कि आपको सिर्फ किसी पार्टी का समर्थन या विरोध नहीं करना है, हरामखोर राजनेता का विरोध करना है, वरना कल को वो आपकी समर्थन वाली पार्टी के मुखिया के मुंह पर चार-छ: करोड़ मारकर उसमें शामिल हो जाएगा, फिर आप क्या करोगे ? अक्सर नेता लोग यही करते हैं ।

इस देश का दुर्भाग्य ही है कि यहां कोई दूध का धुला नहीं है । मोदी, मनमोहन, मुलायम, ममता, माया आदि कोई हो सब मौके का फायदा उठाना चाहते हैं । जब भी सांसदों, विधायकों, मंत्रियों की सुख- सुविधाओं को बढ़ाया जाता है तब पक्ष- विपक्ष एक होकर उसका समर्थन करते हैं । और जब कभी आम नागरिकों से जुड़ी कोई योजना बनती है तो यही सांसद, विधायक, मंत्री कुत्ता, बिल्ली, बंदर की तरह आपस में लड़ना शुरू कर देते हैं । जब ये मंच पर भाषण झाड़ते हैं तो एक दूसरे को बड़ी गालियां देते हैं, बस यहीं से इनके भोले भाले समर्थक आपस में लड़मर कटते हैं, परंतु नेता आपस में कभी दुश्मन नहीं होते । हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और ।

साथियों राष्ट्र का विकास धर्म, जाति, मजहब, चमचागिरी, अंधभक्ति से बाहर निकल कर ही हो सकता है । आप अपने नेता का समर्थन कीजिए, उसके प्रशंसक बनिये, लेकिन वो अगर राष्ट्र विरोधी कार्य करे तो तुरंत उससे सवाल कीजिए । कोई बाप अपने बेटे के हर क्रियाकलाप का आंख बंद करके समर्थन करता है तो वह बेटा बिगड़ जाता है । रोज नये-नये मंत्रियों की भर्ती मतलब जनता पर और अधिक आर्थिक बोझ । ये जान लो साथियों नेता, अफसर सबको आम नागरिक ही पाल रहे हैं, ये आपको नहीं । आपके टैक्स से ही इनको अपार पगार मिलती है, अन्य तमाम सुख-सुविधाओं के साथ । साथियों ! आप जागरूक बनिये…। देश का विकास स्वयं हो जायेगा, कोई राजनेता विकास नहीं कर सकता, ये सिर्फ अपना, अपने परिवार, रिश्तेदारों और प्यादों का विकास करते हैं । आप सवाल कीजिये, यह भी देशभक्ति है ।

  • मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।