
Next Post
घर के संस्कार
Fri Oct 6 , 2017
‘शिवरतन बेटा तुम्हारा साक्षात्कार बुलावा आया है’, मां ने लिफाफा हाथ में देते हुए कहा। यह मेरा सातवां साक्षात्कार था। मैं जल्दी से तैयार होकर दिए गए नियत समय 9 बजे पहुंच गया। एक घर में ही बनाए गए कार्यालय का दरवाजा खुला ही पड़ा था,मैंने बन्द किया और भीतर […]

पसंदीदा साहित्य
-
September 15, 2019
सम्मान
-
March 6, 2017
किस तरह की व्यवस्था ?
-
August 30, 2020
डॉ मसानिया कृत एल्बम का लोकार्पण 4 सितंबर को
-
June 17, 2017
….तो चलते क्यूँ हो
-
May 20, 2017
ज़िन्दगी
