मेरा पहाड़

om prakash fulara
मेरे इस पहाड़ की, बड़ी अजब है बात।
मई जून के महिने में भी , थर थर काँपे गात।।
थर थर काँपे गात, लगे सुहानी काया।
गर्मी में सर्दी का मौसम, बड़ी अजब है माया।
सूरज को भी मिले सहारा, नित बादल के आड़ की।
महिमा देखो अजब निराली, मेरे इस पहाड़ की।
#ओम प्रकाश फुलारा ‘ प्रफुल्ल’
परिचय- 
ओम प्रकाश फुलारा “प्रफुल्ल”
सहायक अध्यापक हिंदी
बागेश्वर(उत्तराखंड) 
पिता – स्व0 श्री विष्णु दत्त
माता  – श्रीमती कमला देवी
पत्नी और बच्चे – श्रीमती मंजू फुलारा, पुत्री प्रियांशी फुलारा, पुत्र प्रियांशु फुलारा
शैक्षिक योग्यता- एम0ए0 बी एड
साहित्य यात्रा का प्रारम्भ वर्ष- 1914 से
साहित्यिक उपलब्धियाँ-
काव्य संग्रह ‘अंकुर’प्रकाशनाधीन
साझा संकलन – धरोहर अपनों की, गुलदस्ता, काव्य दर्पण सहित 3 अन्य साझा संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन
पत्र पत्रिकाएँ- समाचार पत्र में पत्रों का प्रकाशन
विशेष सम्मान पत्र विवरण –
सहित्य सारथी सम्मान,
कवि मनीषी सम्मान,
स्वर सम्राट,
प्रहलाद अनुराग सम्मान,
सौहार्द भूषण,
साहित्य सृजक,
स्टार हिंदी बेस्ट कंटेंट राइटर अवार्ड,
सर्वेश्वर दयाल दुबे साहित्य सम्मान,
स्टार हिंदी साहित्यकार सम्मान,
साहित्य अक्षत सम्मान, साहित्य रत्न, सारस्वत सम्मान ।
विशेष उपलब्धियाँ – अकाशवाणी से लेखों का प्रसारण
स्कूल पत्रिका का सम्पादन

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।