आजादी जो मिली है, इसे संभाले हुए रहना। बुलन्दी के इसके सपने, पाले हुए रहना। अरमान लाखों दिल में, लिए जो चले गए उन अरमानों के तुम ही,रखवाले हुए रहना। शहादत से अपनी इस,प चमन को खिला गए इस चमन की रक्षा को, मतवाले हुए रहना। बहा कर चले गए […]

रतनगढ़ । अणुव्रत विश्व भारती नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत संस्था है। यह संस्था स्कूल विथ ए डिफरेंस प्रयोजना के माध्यम से बच्चों के लिए रचनात्मक माहौल का निर्माण करती है।  इस के अंतर्गत संस्था द्वारा देशविदेश के रचनाकारों से उन की रचनाएं आमंत्रित की गई थी […]

माता जीवन दाता है, माता भाग्य विधाता है । माता जन्म प्रदाता है । माता से जन्मो से नाता है । माता से मिलती नित सीख। माता में दिखता है ईश। माता से मिलती ममता है । माता से न कोई समता है । माता प्रथम गुरु है । माता […]

-गरम – गरम रोटी का  मायना तब पता पङा जब मां ओर घरवाली के साथ एक घंटा गेहूं साफ किये एक – एक कंकङ ओर डूंगली, भोडी ओर घुन रोटी का स्वाद बयां कर रहे थे अनथक मां ओर पत्नी की आंखे रोटी की मनुहार ओर स्नेह की कविता गा […]

मेरे इस पहाड़ की, बड़ी अजब है बात। मई जून के महिने में भी , थर थर काँपे गात।। थर थर काँपे गात, लगे सुहानी काया। गर्मी में सर्दी का मौसम, बड़ी अजब है माया। सूरज को भी मिले सहारा, नित बादल के आड़ की। महिमा देखो अजब निराली, मेरे […]

जा बिटिया जा तुझे विदाई । दर्श दिखाकर अगन लगाई ।। अरमां थे पहली छिब तेरी निरखूँगा दुलार करूंगा तुझे गोद मे खेल खिलाता मेरा घर गुलजार करूंगा ।। सुप्त इच्छाएं आन जगाई । दर्श दिखाकर अगन लगाई ।। दादा-दादी,नाना-नानी मामा-मामी,चाचा-ताई। सब तुझको ही तॉक रहे थे अगल बगल सब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।