तू मेरे एकान्त का एकान्त है
कैसे कह दूँ कि मुझे प्यार नहीं
साँसों की लड़ियों में गुँथे हुऐ लम्हों के मनके
मुझे प्रेम प्रस्ताव ज्ञापित करते हैं
क्यों कह दूँ कि मुझे स्वीकार नहीं,
शब्द निरस्त हो जाते हैं
अधरों पर आकर
जैसे लहरें साहिल पर
तन्य तारों के सुर अंगुलियों पर
और तुम अपनी देहरी पर..
रखो अपने पैर कभी चौकठ-पार
भाव पा जाएँ शब्द
घुल जाए किनारा भी
कंपित हो उठे मन के तार
कि मैं एक कविता लिखूँ …
#अतुल पाण्डेय
परिचय-
नाम -अतुल कुमार पाण्डेय ‘यायावर ‘पिता का नाम- श्री वेद प्रकाश पाण्डेय ।पता-ग्राम पोस्ट बभनौली पाण्डेय,लार,देवरिया,उप्र।२७४५०२। योग्यता -गणित स्नातकोत्तर ,शिक्षा स्नातक ;प्रवक्ता_-श्री रैनाथ ब्रह्मदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय सलेमपुर ।
Wed Dec 5 , 2018
कल -कल करती अविरल जल की धारा… पर्वत से झरती पावन धारा… पशु -पक्षियों की प्यास बुझाती , प्रकृति का सुंदर श्रृंगार करती ! स्वच्छ ,निर्मल ,निश्चछल ,चंचल , बहती जाती … झाग बनाती जैसे दुग्ध धारा कल कल……………. आकुल -व्याकुल -सी हो रही , कोई काव्य रचने को मचल […]