
ज़िंदगी के रंग मंच पर
आदमी है
सिर्फ़ एक कठपुतली ।
कठपुतली
अपनी अदाकारी में
कितने भी रंग भर ले
आख़िर;
वह पहचान ही ली जाती है, कि
वह मात्र एक कठपुतली है ।
ऐसे ही आदमी
चेहरे पर
कितने ही झूठे-सच्चे रंग भरे
अंत में,
रंगीन चेहरे के पीछे
असली चेहरा
पहचान ही लिया जाता है |
#डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’
Fri Sep 7 , 2018
भविष्य निखारता, ज्ञान है बाटता। इंसानियत का पाठ पढ़ाता, अंधेरा हटा उजाला लाता। सपनों को पूर्ण करने मे ,हमे सही राह दिखाता। जीवनपथ पर डटते हुए है, चलना सिखलाता। बच्चों का पढ़ने मे कैसे है ध्यान लगवाना,कला यह बखूबी जानता। ज्ञान का इसमें भंडार भरा है,यही गुरु,यही ब्रह्मा है। धैर्य […]