साहित्य संगम संस्थान बोली विकास मंच द्वारा “क्षेत्रीय बोली वीणा” से सम्मानित हुए कविगण

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साहित्य संगम संस्थान के बोली विकास मंच पर 4 जुलाई 2021 को आयोजित बोली संवर्धन आनलाईन वीडियो कवि सम्मेलन में शिरकत करने वाले क्षेत्रीय बोली काव्य मनीषियों को 12 जुलाई 2021 को साहित्य संगम संस्थान की साक्षात्कार शाला, सांस्कृतिक अधिकारी नारी मंच की अधीक्षिका उमा मिश्रा प्रीति जी की उपस्थिति में सुषमा खरे सिहोरा जबलपुर,मोनिका प्रसाद रांची झारखंड,विद्या दास पश्चिम बंगाल,रीता जी झा कटक उड़ीसा,डॉ भगवान सहाय मीना राजस्थान,उमा ठाकुर नधैक हिमाचल प्रदेश को क्षेत्रीय बोली वीणा सम्मान से सम्मानित किया गया,आपने बताया कि यह मेरे लिए गौरव तथा हर्ष का विषय है कि मुझे इस कार्य के लिए चुना गया।साहित्य संगम संस्थान के द्वारा बहुत ही बढ़िया कार्य किया जा रहा है। बोलियों के संवर्धन के लिए बहुत ही बढ़िया आयोजन /समस्त आयोजक मंडल को बधाई कि आप सब बहुत ही नेक कार्य कर रहे हैं। आप सभी रचनाकारों ने बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति दी,सभी रचनाकार को हार्दिक-हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।सम्मान समारोह कार्यक्रम में उपस्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि बोली विवाद समाप्त कर अपनी बोली में साहित्य सर्जन करें। हिंदी की बोलियां ही हिंदी का परिवार हैं। परिवार वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से ही विस्तार को पा सकता है। एकल परिवार की अवधारणा के कारण ही दुनिया आज घरों में कैद है। बांटते -बाटते कुछ नहीं बचेगा। जुड़ने-जोड़ने मैं ही आनंद है। हिंदी भी तो यही संदेश देती है। एक मंच, एक भाषा, एक राष्ट्र का उद्घोष बुलंद हो। महासचिव कविराज तरुण ने सभी को बधाई देते हुए बोली विकास मंच पर हो रहे कार्यक्रम की सराहना की।
बोली विकास मंच पर नवीन कुमार भट्ट नीर संयोजक के दायित्व को आप सबकी सहभागिता से निरंतर सफलता पूर्वक यह कार्यक्रम सम्पन्न हो रहा है, अभिव्यक्ति पंक्ति

क्षेत्र की आधार होती हैं बोलियां
नित नव साकार होती हैं बोलियां
सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से पली,
मीठे रस आकार होती हैं बोलियां।। नीर

क्षेत्रीय बोली को उभारने के लिए साहित्य संगम संस्थान बोली विकास मंच लगातार तीन वर्षों से सेवा कर रहा है, बोली विकास मंच पर हर माह के प्रथम आदित्यवार को होने वाले कार्यक्रम में पूर्व माह विज्ञप्ति के माध्यम से मौलिकता प्रमाणपत्र संलग्न करवाया जाता है,पटल के निर्धारित नियमानुसार चयन सूची तैयार की जाती है नव हस्ताक्षरों को सुअवसर प्रदान किया जाता है, उक्त कार्यक्रम में मौलिकता प्रमाणपत्र विधिवत भरकर जमा करने वाले मनीषियों को काव्यपाठ के लिए आमंत्रित किया जाता है, ज्ञातव्य हो की यह कार्यक्रम मे शिरकत कर कर सकता है,आप सबकी सहभागिता आज साहित्य संगम संस्थान का वट वृक्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है, सम्मानित सभी मनीषियों को बोली विकास मंच साहित्य संगम संस्थान की ओर से सादर बधाई साथ ही आज के कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति में कविगणों को सम्मानित करने के लिए उमा मिश्रा प्रीति जबलपुर को सादर वंदन अभिनंदन करता हूं आपके आशीर्वाद से नित नए आयाम हासिल प्रदान कर साहित्य संगम संस्थान निश्चित ही कीर्तिमान स्थापित करेगा,साथ ही मंच पर उपस्थित अर्चना तिवारी, सरिता श्रीवास्तव, जूली अग्रवाल, अनिल धवन, डॉ अतुल द्विवेदी अंजाना, रामबाबू प्रसाद,सरिता शुक्ला, छाया सक्सेना प्रभु, प्रेमलता उपाध्याय स्नेहा सभी पदाधिकारियों, विद्वानों को सादर प्रणाम कर इस कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा करता हूं।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।