श्रीराम जन्मभूमि व सामाजिक समरसता रहेंगे बैठक के केन्द्र बिन्दु : जस्टिस कोकजे

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vinod bansal

नई दिल्ली। 

विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक आज राजधानी दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति दर्शन समिति, में महामण्डलेश्वर पू0 स्वामी राघवानंद जी के आशीर्वचन से प्रारंभ हुई। अपने उद्घाटन उद्बोधन में विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (रिटा0) श्री विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में भव्य मंदिर हेतु सैकड़ों वर्षों के संघर्ष की परिणिती का समय निकट है। 1984 से सदा ही श्रीराम जन्मभूमि का मामला हमारे कार्य का केन्द्र बिन्दु रहा है और मंदिर की भव्यता तक रहेगा। माननीय उच्चतम न्यायालय से आग्रह है कि वह शीघ्रताशीघ्र अपना निर्णय सुनाए। सामाजिक समरसता के संदर्भ में विहिप की प्रतिबद्धता पर उन्होंने कहा कि 54 वर्षों में छुआ-छूत के उन्मूलन हेतु हमने अनेक कार्य किये हैं किन्तु बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है। विषमता किसी धर्म से जुड़ी न होकर एक मानसिक विकृति है जिसे व्यक्तिगत आचरण के द्वारा ही दूर किया जा सकता है। यह सिर्फ सरकार का नहीं बल्कि सम्पूर्ण समाज की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक पिछड़े  को गले लगाकर आगे बढ़ाए। 23 जून को डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस तथा 25 जून 1975 को आपातकाल के आक्रमण को याद करते हुये उन्होंने कहा कि हमारी इस बैठक की तिथियों से शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दू साम्राज्य दिवस का पावन दिन भी जुड़ा है। छद्म धर्म-निरपेक्ष लोगों पर प्रहार करते हुये उन्होंने कहा कि यह विहिप व हिन्दू समाज के कार्यों का ही परिणाम है कि जो लोग कल तक हम पर प्रहार करते थे आज जनेऊधारी हिन्दू बनने का दिखावा कर रहे हैं। हमारी इस बैठक में आये पदाधिकारियों को धर्म-परिवर्तन, गौ-हत्या, विदेशी घुसपैठ हिन्दू मानबिन्दुओं पर आक्रामण सहित अन्य धार्मिक सामाजिक व राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा कर उनका समाधन ढूंढ़ना होगा।

दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात अपना आशीर्वचन देते हुये महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी राघवानंद जी महाराज ने वेद, वेदांग, उपनिषद तथा वैदिक वांग्मेय के पठन पाठन व विस्तार हेतु आह्वान करते हुये कहा कि देशभर में वेद विद्यालयों की स्थापना की नितांत आवश्यकता है। इस संदर्भ में विहिप कार्यकर्ताओं को आगे आना होगा।

इस अवसर पर मंच पर विहिप कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार व श्री अशोक चौगुले (विदेश), महामंत्री मा0 मिलिन्द पराण्डे, संगठन महामंत्री श्री विनायकराव देशपाण्डे, उपाध्यक्ष श्री चम्पतराय, श्री ओम प्रकाश सिंहल, श्री जीवेश्वर मिश्र, श्री हुकुमचंद सांवला, श्री जगन्नाथ साही, श्री बालकृष्ण नाइक, श्रीमती मीनाताई भट्ट, सह कोषाध्यक्ष श्री गोपाल झुनझुनवाला भी उपस्थित थे।

#विनोद बंसल

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आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।