जिनको हमने दोस्त बनाया , वही पीठ पर भोके खंजर। जिनको हमने अपना माना उनके हाथ खून से लता पथ। देखो चीन पुनः सीमा पर, युद्ध करने के लिए आया है । भारत ने भी ठान लिया है , अक्साई भारत बनाना है ।। तम्बू गाड़े या बनाये बंकर , […]

कितने लोग होंगे जो छोटे शहर से राजधानी के बीच ट्रेन से डेली – पैसेंजरी करते हैं ? रेलगाडियों में हॉकरी करने वालों की सटीक संख्या कितनी होगी ? आस – पास प्राइवेट नौकरी करने वाले उन लोगों का आंकड़ा क्या है , जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह […]

जिस प्रकार बहरूपिया बदल लेता है नित अपना रूप इसी प्रकार प्रकृति भी लेती है बदल नित नया रूप कभी हवा सुहावनी कभी धूल भरी आंधी कभी शीत-लहर कभी झुलसाती लू कभी धुंध कभी बरसात कभी ओलावृष्टि कितने रूप बदलती है प्रकृति विनोद सिल्ला फतेहाबाद (हरियाणा) Post Views: 42

*साहित्य की ये सरिता यूँ ही अविरल बहती रहे:- कुशवाह* भवानीमंडी | अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई भवानीमंडी द्वारा प्रकाशित साहित्य दर्शन ई पत्रिका के चतुर्थ अंक पावस प्रकृति और प्रीति का विमोचन भव्य ऑनलाइन विमोचन समारोह में सोमवार को मुख्य अतिथि भंवरसिंह कुशवाह प्रधान संपादक बालाजी टाइम्स के कर कमलों […]

पीछे हट गया चीन शैतान देख ताकत निकल गई जान सारा कब्जा छोड़ना होगा वर्ना परिणाम भुगतना होगा शांति के है हम पक्षधर युद्ध हमारी पहचान नही जमीं पर हमारी गड़ाये दृष्टि यह किसी की ओकात नही अभी डेढ़ किमी पीछे हटा है शेष भूमि से भी हटना होगा कोई […]

कार्यक्रम निर्देशक नवीन कुमार भट्ट नीर ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए बताया की साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा बोली विकास मंच मंच पर 05 जुलाई 2020 रविवार को बोली संवर्धन ऑनलाइन वीडियो कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आद डॉ राकेश सक्सेना जी एटा उत्तर प्रदेश, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।