न दिल लगता है न मन लगता है। सच कहे तो दिल में मेरे अब कोई तो बस्ता है। जिसे में ढूँढ़ रहा हूँ और हो सकता है। वो भी मुझे तलाश रहे हो इस भीड़ में। कभी तो मुलाकात उन से होगी ही। पर तब तक तो दिलो में […]

झूठ,बेईमानी,मक्कारी से हो गए कुछ लोग मालामाल सत्य,ईमानदारी,सादगी में अच्छे लोग हो रहे बेहाल इसका दोषी कोई ओर नही है कलियुग का महाकाल जहां गधे पजरी खा रहे है बौद्धिक बजा रहे सिर्फ गाल इस कलियुग के प्रभाव से अब तो मुक्ति पानी ही होगी जो विकार घेरे है हम […]

पहला मेच पाक से, कोहलि बने विराट । धोनी मोहित छा गये, शिखर धवन सम्राट । । अफ्रिका भी हार गया, भारत मारे तीर । शिखर सैंकड़ा मारके, बने टीम के पीर।। संयुक्त अमीरांत मे, रोहित बने महान । नौ विकेट से जीतके,शमी देश की शान।। चौथा वेस्टइण्डीज से, जीते […]

जब रंगा जाऊँ तो हरा हो जाऊँ, जब कहा जाऊँ तो मधुर बन जाऊँ। जब ढूंढा जाऊँ तो व्यक्त हो जाऊँ, जब काटा जाऊँ तो मुलायम हो जाऊँ। जब देखा जाऊँ तो नजर आ जाऊँ, जब सुना जाऊँ तो गहन हो जाऊँ। जब चला जाऊँ तो स्मृति बन जाऊँ, जब […]

भाई बहिन का ये रिश्ता, कैसा अजीब है ये रिश्ता। लड़ते झगड़ते है ये आपस मे, फिर भी टूटता ना ये रिश्ता।। लड़ झगड़ कर एक हो जाते, एक दूजे के बिन रह न पाते। जब हो जाते एक दूजे से नाराज, बिन मनाएं ये रह नहीं पाते।। भाई बहिन […]

सदा गुलाब से खिलते रहो कांटो के संग भले ही रहो सद्कर्मो की महक फैले ऐसा सदाचरण करते रहो कलियुग की इस कोठरी में बेदाग हमेशा बने रहो सतयुग आहट हो चुकी है कलियुग उम्र बीत चुकी है तमस बाद उजाला निकलेगा आशाओ का दीपक जलेगा युग परिवर्तन के नायक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।