Archives for लघुकथा

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एक रात….

उस रात में किसी के घर की बगिया में रात की रानी की कलि खिलने वाली थी , रात का पहला पहर था श्वेत चांदनी मानो यशराज फिल्म्स के हीरोइन…
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“ढलती साँझ की धुँध”

 "तुम चले जाओगे तो सोचेंगे ,हमने क्या खोया क्यापाया" हॉस्पिटल के वेटिंग रूम में लगे टी.वी पर जगजीत की इस गजल को रिटायर्ड जज नासिर खान सुन रहे थे। साठ बसंत देख…
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खतम

१ >    दस साल का बच्चा होस्टल में ,,,घर से नेपाली नौकर उसे घर ले जाने को आया ,,,,,,,,बोला --बाबा घर चलो आपका पापा ख़त्म हो गया ,,,,,,,,उसने कहा…
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हमारे बचपन का बड़े वाला रेडियो और आज का मोबाइल एफ. एम.

समय के बदलाव के बहाव में बहुत सारे बदलती वस्तुओं के साथ जीवन से जुड़ा एक अहम हिस्सा भी बहुत बदल गया।बात उन दिनों की शायद 1986 की जब छटी…
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“गरीबी कर”

एक  राजा था।उसे आभास हुआ कि एक कुएँ  में  कुछ लोगों  ने अवैध तरीके से गहने छुपा रखे है। उसने अचानक अपने  सिपहियों को कुआं खोदने का हुक्म दिया।खुदाई शुरू…
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हस्तेक्षप

सुबह के आठ बजने को थे। रमा अपने दोनों बच्चों का टिफिन बनाकर उन्हें स्कूल बस में बैठाकर लौटी ही थी कि तभी फ़ोन घनघना उठा। बुरा सा मुँह बनाकर…
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