रमेश आते ही अपनी चाची को गोद में उठा लिया और बोला – ” चाची ! मैं मेडिकल की परीक्षा में अब्बल नंबर से पास हो गया । “ और वह खुशी से फूला नहीं समा रहा था । अपनी चाची को गोद में उठाये झूमने लगा । ” अरे […]

कभी गली का गुंडा हुआ करता था हरेराम । एक दिन नेताजी के कार्यक्रम में पूडी-सब्जी खाने के लिये चला गया और फिर उसी दिन से हरेराम नेताजी की पार्टी का कर्मठ कार्यकर्ता बन गया । अब हरेराम के गले में पार्टी का गमछा होता और माथे पर एक हाथ […]

दौलत – शौहरत और ऐशो – आराम की जिंदगी व्यतीत करने वाली रेखा अपने दो बच्चों के साथ फुटपाथ पर बैठी आंसुओं के समंदर में गोते लगा रही थी । भूख से बिलखते बच्चे और दाने – दाने को मोहताज रेखा दर – दर की ठोकरें खाने को मजबूर थी […]

राष्ट्र और इंसानियत के लिए दिखावा करने वाले नेता जी ने मंच से जोशीला भाषण झाड़ना शुरू किया, ‘मित्रों ! मैं ये देश किसी भी हालत में बिकने नहीं दूंगा । अपने देश के नागरिकों का सिर झुकने नहीं दूंगा ।’ भाषण सुन रहे लोगों ने तालियां बजाना शुरू कर […]

सुडौल शरीर , गोरा रंग और तीखे नैन नक्श की अनामिका जब सज – संवर कर निकलती , तो लोग उसे एकटक निहारते रह जाते । अनामिका थी ही ऐसी कि लोग उसे देखकर आहें भरा करते । अनामिका के पति काम के सिलसिले में प्राय: बाढ़ से बाहर ही […]

विनीत आज खुशी से फूला नहीं समा रहा था । घर के सभी लोग भी प्रसन्न नजर आ रहे थे । इस खुशी का राज था विनीत का रश्मि से विवाह होना । रश्मि थी ही ऐसी लड़की । विनीत उसके रंग – रूप देखकर ही उस पर मुग्ध हो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।