सभी जानते है लोक डाउन क्या है, यह भी जानते कि यह आवश्यक है, क्योंकि हम लगभग भूल चुके थे, मास्क पहनना, हाथ धोना, दूरी बनाकर रखना। हम भूल चुके थे कोरोना संक्रमण। लगभग एक वर्ष होते होते हम इसके अभ्यस्त हो चुके थे, प्रशासन भी अब सावधानी के इतर […]

कोरोना ने पूरी तेजी के साथ पुन: दस्तक दे दी है। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है। पीडितों का हाल बुरा है। सरकारें अपने ढंग से देश को चलाना चाहतीं हैं और डब्ल्यूएचओ अपने ढंग से। सरकारें सत्ता की ललक में निर्णय ले रहीं हैं और डब्ल्यूएचओ किसी के खास […]

कभी अंधेरों में रोशनी को ढूँढ़ता हूँ। तो कभी रोशनी को अंधरो में खोजता हूँ। एक दूसरे के बिना दोनों ही अधूरे से हैं। इसलिए दीयावाती तेल दोनों के पूरक हैं।। जिंदगी के सफर में कुछ कुछ होता रहता हैं। कभी जिंदगी में अंधेरा तो कभी उजाला होता है। पर […]

महोदय, आपका टोटल हेल्थ कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र के लोग नहीं देख रहे हैं जबकि इस कार्यक्रम की आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्र में सबसे अधिक है। कार्यक्रम न देखने का एक कारण यह है कि आपके जो प्रस्तोता, विशेषज्ञ एवं डॉक्टर हैं वे यह कार्यक्रम हिंग्लिश यानी कि अंग्रेजी और हिंदी की […]

लोकतंत्र के नाम पर पूंजीवाद के मकड़जाल में फंसता आदमी । असुरक्षित सत्ता से सुरक्षा की गुहार लगाता आम आदमी । भावनाहीन, तर्कहीन चाटुकार प्रशासन से अपनी सुविधाओं की भीख मांगता आदमी । राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही सैनिकों के खून पर फिर से सत्ता सुंदरी को पाते हैं […]

चुनाव के समय नही कुंभ के समय आता है कोरोना नेताओं को नही श्रद्धालुओं को डराता है कोरोना कुंभ के लिए निगेटिव होना जरूरी है पोजेटिव को ही खाता है कोरोना दिन में कही घूमो नही मिलता कोरोना रात में कर्फ़्यू लगाया ताकि न आए कोरोना।#श्रीगोपाल नारसन Post Views: 6

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।