जब दरवाजा खोला,तुम्हारी आँखों में आँसू चेहरे पर बेबसी थी | पहले क्यों नहीं बताया तुमने,मेरी ऊँगली दरवाजे में फंसी थी || गमले के फूल गिर जाते है,जब तुम आती हो | क्या तुम अंधी हो,बेचारे गमले से टकराती हो || तुझ को तुझ से चुरा लू,कहने को तो बड़ी […]

याद आ रहे है हमे, वो बचपन के दिन। जिसमे न कोई चिंता, और न ही कोई गम। जब जैसा जहां मिला, खा पीर हो गए मस्त। न कोई जाति का झंझट, न कोई ऊंच नीच का भेद। सब से मिलकर रहते थे, जैसे अपनो के बीच । पर जैसे-2 […]

मंत्रीजी घंटा बजाकर अपने पूजागृह से एक हाथ लम्बा तिलक लगाकर बाहर आये ही थे कि उनका सहायक हाँफता हुआ उनके सामने आ गया | ‘अरे! काहे हाँफत हो… आसमान फट गया क्या?’ ‘साबजी – साब जी… बड़ा अनर्थ हो गया | जनपद में पुलिस ने बड़ी बर्बरता से बेचारे […]

नई दिल्ली। नवम्बर, 17, 2019। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने आज साफ किया है कि श्री राम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण हेतु किसी प्रकार का धन संग्रह नहीं किया जा रहा है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने आज एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू […]

स्वर्ग यही,नरक यही जो सोच लो वही सही अच्छा सोचोगे अच्छा होगा बुरा सोचोगे बुरा होगा चाहते हो अगर अच्छा हो मन भी हमारा सच्चा हो हम सच ही सच अपनाये स्वयं सचमय ही हो जाए एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा स्वयं को समझ परमात्म बच्चा झूठ स्वतः मिट […]

सशक्त है बदलाव में धरा का दर्द ज्ञात नहीं जुड़ाव संस्कृति से था जो वो हमे अब भाता नहीं बदलाव सिर्फ बदलाव अच्छे से बुरे की ओर जा रहे ओर मान रहे बदलाव इस बदलाव ने धरा का छीन लिया मान दर्द सिर्फ धरा का नहीं शीन हो गए सभी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।