सुनो सुनता हूँ में अपने हृदय की पीड़ा। न दिल में मेरे प्यार उमड़ता है अब कभी। खाली जो कर दिया हमने इसके भंडार को। तो कैसे लूटा पाएंगे अब प्यार हम यहां। करते रहे पूजा जिस प्यार की जीवन भर। भरी लगने लगा अब ये प्यार वाला शब्द। राधाकृष्ण […]

अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक आ चुकी थी, परंतु मयंक अपनी पढ़ाई को छोड़ मोबाइल व लैपटॉप पर गेम खेलने में मस्त था | गेम खेलने से समय बचता तो उसे टेलीविजन पर कार्टून, सीरियल देखने में निकाल देता | देर रात तक इलेक्ट्रिक दुनिया में खोया रहकर सुबह देर से जागता, […]

आत्मबल अंतर में रख जिसने स्वतंत्रता दिलाई थी। गौरों को सबक सिखाकर जिसने वीरता दिखाई थी।। आज़ादी जिसका मूलमंत्र कसम देश की खाई थी। नेताजी संग नोजवानों ने ली तब अंगड़ाई थी।। दूर फिरंगियों को करने की ताकत तभी दिखाई थी। बोस के भाषण से अंग्रेजी शासन की नींद उड़ […]

शब्द साधना करते रहिए कुछ भी नया रचते रहिए सरस्वती बसी रहे जीभ पर ऐसी वाणी बोलते रहिए ‘शब्द ‘साधक निमित्त मात्र है रचियता तो त्रिलोकीनाथ है उन्हीं को याद करते रहिए अच्छा कुछ लिखते रहिए इसी से आत्म सन्तोष मिलता इसी से व्यक्तित्व खिलता कलम अपनी चलाते रहिए सबको […]

बेटियाँ आँखों का नूर हैं, देश का कोहिनूर हैं बेटी को नहीं हम अब यूँ ठुकराते हैं बेटी का होना अब नहीं दुर्भाग्य मानते हैं बेटी दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती बन आती है बेटी घर में अमन चैन सुख शान्ति लाती है बेटियाँ आँखों का नूर हैं, देश का कोहिनूर हैं […]

सियासत में कुछ भी निर्धारित नहीं होता यह अडिग सत्य है। जिसका मुख्य कारण यह है कि सियासत में जब भी जहाँ भी जैसी आवश्यकता होती है राजनीति उसी अनुसार गतिमान हो जाती है। जी हाँ बिहार की राजनीति ने एक बार फिर से नई करवट ली है जिसकी जिम्मेदारी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।