जन्म शताब्दी विशेष ● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ आज से ठीक एक शताब्दी पूर्व यानी 22 अगस्त 1924 जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में एक कायस्थ परिवार में अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हरिशंकर परसाई जी का जन्म हुआ था। 18 वर्ष की उम्र में वन विभाग में नौकरी की, फिर खंडवा […]

जब धरती के गहन, गंभीर और रत्नगर्भा होने के प्रमाण को सत्यापित किया जाएगा और उसमें जब भी मालवा या कहें इंदौर का उल्लेख आएगा, निश्चित तौर पर यह शहर अपने सौंदर्य और ज्ञान के तेज से बख़ूबी स्वयं को साबित करेगा। हिन्दी और अन्य भाषाओं में इंदौर के पत्रकारों […]

● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ भारतीय सांस्कृतिक चेतना के उन्नयन और नव जागरण में बंगाल की धरती का योगदान अभूतपूर्व रहा। प्रारब्ध से ही संस्कृति, साहित्य, कला के केन्द्र में बंगाल की समिधाओं का अपना हिस्सा रहा है। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, शरतचंद, निराला जैसे महनीय लोगों की धरा बंगाल […]

4 अगस्त-जयंती विशेष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर आज समूचे भारत में पत्रकारिता की नर्सरी माना जाता है। महनीय सम्पादकीय परम्परा की नींव माने जाने वाले शहर इन्दौर की इमारत की बुलन्दी को खड़ा करने में जिन साधकों के श्रम दर्ज हैं, ऐसे योद्धाओं में एक नाम अभय छजलानी भी […]

कालजयी साहित्यकार के रुप में विख्यात मुन्शी प्रेमचंद जी सदियो से पीढ़ी-दर-पीढ़ी साहित्यिक प्रेमियों के ह्रदय पटल पर अंकित है और उनका नाम आज भी स्वर्णाक्षरों में अंकित है। हिंदी के पहले उपन्यासकार और कहानीकार प्रेमचंद जिन्होंने पीढ़ियों और समय की सीमाओं को पार कर लिया और आज तक हिंदी […]

कला के धनी धनपतराय, श्रद्धेय प्रेमचंद जी का जन्म इकतीस जुलाई सन अठारह सौ अस्सी में ग्राम लमही वाराणसी में हुआ था। पिता अजायब लाल जी तथा माँ आनंदी देवी के इस महान सपूत के हिंदी साहित्य में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। साहित्य को आदर्शवाद की काल्पनिक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।