Archives for हायकू

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माँ

ब्रम्हांड है माँ ! अनुभूति प्रथम ! संपूर्ति है माँ ! निःस्वार्थ भाव ! संघर्ष झेलती वो ! है निर्मात्री माँ ! पुनीत भाव ! पवित्र परिभाषा ! पावन है…
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हाइकू..

माता व पिता, ईश्वर ही तो होते हैं.. घर मन्दिर। घर आँगन, सजे हैं बेटियों से.. सम्मान पात्र। भला ही लागे, प्रफुल्लित मन से.. हर त्यौहार। शक़ का बीज, एक…
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कोई रंग नहीं भाया

हर तरफ रंग के निशान थे, मुझे कोई रंग नहीं भाया। कोरी कागज-सी खिड़की पर बैठी रही, क्योंकि वो नहीं आया।। गाँव गलियां रंगीं सारी सखियाँ रंगीं, मैंने आँसू से…
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गौरैया…

"आज विश्व गौरेया दिवस पर विशेष" चोंच में दाना, उठा उड़ी गोरैया.. चुगाती चूजे। कब आओगी, गौरैया मेरे द्वार.. दाना चुगने। पेड़ पर है, तिनकों का घोंसला.. गौरैया नहीं। नन्हीं…
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हाइकु

ओछे मन के, लोग होते ओछे ही बड़े न होते। दौड़ते लोग, शुगर से लाचार संयम नहीं। मुखौटे लगा, छुपाते हैं चेहरे सच्चे बनते। चैन हराम, दौड़ें जीवन भर धनी…
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काव्यभाषा

उदास शाम

हायकू उदास शाम.. गमगीन हवाएं तन्हा मौसम। गहरे पल, अधूरा एक ख़्वाब. सांसें बोझिल। सुहानी याद, बैचेन-सा मौसम.. भीगे हम। बिखरे रंग, लहराता है आंचल.. हँसे आँगन।      #आभा…
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