विद्यासागर जी की वाणी सुनो। ज्ञान अमृत का रसपान करो। ज्ञानसागर जी की दिव्य ध्वनि सुनो। जैन धर्म का पालन करो। विद्यासागर जी की वाणी सुनो।। आज हम सबका यह पुण्य है। मिला है हमें मनुष्यब जन्म ..। किये पूर्व में अच्छे कर्म। इसलिए मिला मनुष्य जन्म। गुरुवर के मुख्य […]

मेरे जीवन में जब तक माँ मेरे साथ थी मैं कभी भी उस तरह से उसे नहीं देख सका जिस तरह से मुझे जन्म देकर उसने देखा था ना ही कभी सुन सका मैं उसकी तरह क्योंकि वह हृदय से श्रवण करती थी और मैं श्रुतिपटों से सुनता था अब […]

तू तो मुझको याद है चाहे, याद मेरी तुझे न आये इतना सदा याद रखना कि, तुझ बिन कुछ भी ना भाये। बरसातें ये रिमझिम रिमझिम, कतरा कतरा यादें हैं बारिश की बूंदों सी टिप-टिप, आंख से गिरते वादे हैं थोड़ा भी ना बदल सके हम, आज भी कितने सादे […]

गुरु बिन न बुद्धि मिले,गुरु बिन न होए ज्ञान। गुरु बिन न पथ मिले,गुरु बिन न मिटे अज्ञान।। गुरु तीनों देव है,इससे बड़ा जग में न कोय। जो इसकी शरण मेंजाए,उसका हित होय।। मां सबसे पहली गुरु है,जो सिखाती सब ज्ञान। उसकी पहले वंदना करो,जो रखे तुम्हारा ध्यान।। गुरु की […]

एक दफा, हम राह पर चल रहे थे तो एक नजारा मिला, नजारे को गौर से देखा तो एक घूमता हुआ परवाना मिला । हम तो यूं ही उसकी तरफ चले जा रहे थे, लेकिन जब वहां पहुंचे तो एक ना भुलाएँ जाने वाला अफसाना मिला ।। जब उस अफ़साने […]

कदम्ब की डाल पर डोलती कोयल। पीऊ- पीऊ, कुहू- कुहू बोलती कोयल।। सुख – दुख में शुभ गीत गाने वाली। थके मादे लोगों को झुमाने वाली।। इस डाल से उस डाल पर डोलती कोयल। पीऊ- पीऊ, कुहू- कुहू बोलती कोयल।। नीरस पल में भी रस पाने वाली। ऋतुराज के संदेश […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।