Archives for व्यंग्य

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श्मशान घाट

संसद भवन में नेताजी पर विपक्ष जोरदार प्रहार कर रहा था।  "गांव के विकास और उन्नति के लिए नेताजी ने आज तक कुछ नहीं किया। जबकी वर्षों से गांव के…
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प्रिये……….

फसल लहलहाती तुम अफीम की मैं सूखा  पीड़ित  ईख   खेत  प्रिये हो मिट्टी तुम चिकनी और मुल्तानी ज्येष्ठ धूप में तपती मैं गर्म रेत प्रिये हो छड़ी  जादुई बालपरी  की …
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फिर क्यों आई हो ?

बार-बार इनकार करने पर भी पीछा नहीं छोड़ती,तुम समय व स्थान का भी अनुमान नहीं लगाती,कब कौन-कहाँ-कैसी भी अवस्था में हो,तुम तपाक से आ जाती हो। लाख मना करने पर…
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ठलुआ और ठंड

देश में ठलुओं की कमी नहीं है। ठलुओं को ठंड सबसे ज्यादा लगती है। ठलुओं और ठंड का वही रिश्ता है,जो बाबूओं का लंच समय में ताश का। ठंड आते…
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साली-सत्ता

  साली देखने में अच्छी लगती है,उसकी बात करने में आनन्द आता है,कुछ को मजा भी आता है। साली के साथ विचरण की इच्छा में न जाने कितने जीजा भ्रष्टाचार…
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