Archives for धर्मदर्शन

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“विशुद्ध वंदना”

वेष दिगम्बर धारी मुनिवर करुणा अब जगाएँगे पार करो खेवैया नहीं तो हम भव में ठहर जाएँगे भक्ति भाव से आपको पुकारें हे! विशुद्ध महासंत कृपा प्रकटाओ अपनी नहीं तो…
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नेमी प्रभु

जहां नेमी प्रभु पशुओं की पीर देख वैराग्य पथ चुन लेते हैं जहां राम वन में भी रहकर शाकाहारी रहते है जहां वाईवल गीता पुराण सब हिंसा के खिलाफ है…
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 भगवान  महावीर की वाणी की सत्यता ।

कितना कुछ इस पंचम काल या कलयुग में होगा या जो हो रहा है , इसे हमारे भगवान की वाणी मे कहा गया कि पंचम काल या कलयुग मे मनुष्य…
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भूतो न भविष्यति,राजा भोज यथा दूजा राजा

शौर्य और ऐश्वर्य युगीन राजा भोज का नाम याद आते ही सत्य,साहस,ज्ञान,कौशल और जलाभिषेक का बोध होने लगता है। सम्यक कालजयी बनकर `भूतो न भविष्यति,राजा भोज यथा दूजा राजा` की…
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सूर्य उपासना का पर्व :मकर सक्रांति

मकर सक्रांति को उत्तरायण,माघी, खिचड़ी संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। प्रतिवर्ष हम सब मकर सक्रांति मनाते हैं। पोष माह में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि…
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