. ✨✨✨ हिन्दी हिन्दुस्तान की, भाषा मात समान। देवनागरी लिपि लिखें, सत साहित्य सुजान। सत साहित्य सुजान,सभी की है अभिलाषा। मातृभाष सम्मान , हमारी अपनी भाषा। सजे भाल पर लाल, भारती माँ के बिन्दी। भारत देश महान, बने जनभाषा हिन्दी। . ✨✨✨ भाषा संस्कृत मात से, हिन्दी शब्द प्रकाश। जन्म […]

दिल रब ने दिया है तो। किसी न किसी से तो मिलेगा। प्यार की कश्ती में ये दिल बैठेगा। तभी तो दो दिलो का मिलन होगा।। दिलो की बात दिलवाले समझते है। प्यार करना परवाने जानते है। नजरे जब किसी से मिलती है। तभी तो ये दिल धड़कता है।। गलत […]

जिनकी वजह से हम है उन्हें जितना याद करो कम है हमे पालपोस कर छोड़ गए सदा खुश रहने की दुआ दे गए जो कुछ था वह हमें दे गए खाली हाथ आए थे खाली हाथ चले गए कही पिता तो कही दादा मेरे अतीत का आईना है मां ,दादी,नानी […]

वो इस कदर बरसों से मुतमइन* है जैसे बारिश से बेनूर कोई ज़मीन है साँसें आती हैं, दिल भी धड़कता है सीने में आग दबाए जैसे मशीन है आँखों में आखिरी सफर दिखता है पसीने से तरबतर उसकी ज़बीन* है अपने बदन का खुद किरायेदार है खुदा ही बताए वो […]

आ बैठे उस पगडण्डी पर, जिनसे जीवन शुरू हुआ था। बचपन गुरबत खेलकूद में, उसके बाद पढ़े जमकर थे। रोजगार पाकर हम मन में, तब फूले ,यौवन मधुकर थे। भार गृहस्थी ढोने लगते, जब से संगिनी साथ हुआ था। आ बैठे उस पगडण्डी पर जिनसे जीवन शुरू हुआ था। रिश्तों […]

हिंदी मेरी मातृभाषा , हिंदी मेरी जान ! हिंदी के हम कर्मयोगी , हिंदी मेरी पहचान , हिंदी मेरी जन्मभूमि , हिंदी हमारी मान , हम हिंदी कि सेवा करते है , हम जान उसी पे लुटाते है , हिंदी हमारी मातृभाषा , हिंदी हमारी जान ! है वतन हम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।