मैं एक उड़ती चिड़िया सी, किस ओर निकल जाऊँ कह नहीं सकती पंख फैलाए आसमान में क्षितिज को छू आऊँ कह नहीं सकती। कभी बैठूं मैं इस डाल पर कभी निकल जाऊ दूर गगन कभी मुंडेर पर बैठ गाऊँ। कभी पानी में करू छपक मुझे पाना नहीं है कुछ, न […]

कन्धों पर चढ़कर यहाँ तक नहीं आए हैं रात से सुबह तक में यहाँ तक नहीं आए हैं सहे हैं कई दर्द और घाव पैरों ने सफ़र में किसी की बदौलत यहाँ तक नहीं आए हैं बड़ी मेहनत से बुना है हमने भी ताना-बाना किसी की गाली सुनी किसी का […]

आम मतलब हर पल किसी अनहोनी की आशंका में डरा हुआ आदमी इसी बात से खुश आदमी तो है मगर इसका कोई मतलब भी है हर वक्त खुद से भागता कल का समय काटने के बहाने ढूंढ़ता अपने बच्चों तक से झूठ बोलता कोई चेहरे का दर्द न पढ़ सके […]

आज मैंने आईने को तब फूट-फूट कर रोते देखा जब सब उसे झूठा ठहरा रहे थे। उसने कहा मुझे प्रतिबिंब ही तो दिखाना है। जब लोग अपने चेहरे पर परत दर परत झूठ चढ़ा लेते हैं तो खुद को पहचान पाते हैं क्या? अर्द्धेन्दु भूषण इन्दौर, मध्यप्रदेश लेखक वर्तमान में […]

क्या मजबूरियां भी जेनेटिक होती हैं? मुझे तो ऐसा ही लगता है क्योंकि आज मैंने अपने बच्चे की आंखों में उन्हीं सपनों को डूबते-उतराते देखा जिन्हें मैं अपने बचपन में कई बार पूरी तरह डूबो चुका हूँ। अर्द्धेन्दु भूषण इन्दौर, मध्यप्रदेश लेखक वर्तमान में दैनिक प्रजातंन्त्र के सम्पादक और स्तम्भकार […]

जीवन का नेटवर्क जब सही-सही काम नहीं करता तब ऐसा लगता है काश! ईश्वर ने कोई रिस्टार्ट बटन दिया होता। या जब बहुत सारी स्मृतियाँ दिल का बोझ बढ़ाने लगती हैं तब भी मन कोई डिलीट ऑल का बटन तलाशने लगता है। अर्देन्दु भूषण इन्दौर, मध्यप्रदेश लेखक वर्तमान में दैनिक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।