बहने लगे जब चक्षुओं से किसी पिता के अश्रु अकारण समझ लो शैल संतापों का बना है नयननीर करके रूपांतरण पुकार रहे व्याकुल होकर रो रहा तात का अंतःकरण सुन सकोगे ना श्रुतिपटों से हिय से तुम करो श्रवण अंधियारा कर रहे जीवन में जिनको समझा था किरण स्पर्श करते […]

घर का मिजाज कुछ बदला बदला सा, नजर आ रहा है। मानो घर में कोई, तूफान सा छा रहा है। यह मुझे घर का माहौल बता रहा है। और प्रिये तेरी नजरो में, मुझे नजर आ रहा है। लगता है पूरी रात, तुम सोये नही हो। तभी तो चेहरा मुरझाया […]

समय की रेत पर फिसल गयी जिंदगी। देखते ही देखते में ढल गयी जिंदगी।। करवटें बदल-बदल सोया निशदिन, अंत में करवट बदल गयी जिंदगी।। दुल्हन जस सजाकर रखा था इसे, हाथों से यूं ही निकल गयी जिंदगी।। हवा से बचा कर रखा था सुरक्षित , रखे-रखे बर्फ जस गल गयी […]

अच्छे दिन की बातें करके सत्ता पाकर, मद में सब नेता सत्ताधारी गर्वित हैं। जनता को अब कौन पूछता है फुसलाकर। केसरिया रँग को धारे बनते धर्मित हैं। कमर तोड़ती मँहगाई जनता पर भारी। चीख पुकार रही है जनता।नहीं सहारा दिया किसी ने।रोक नहीं कोई सरकारी। पाई पाई को तरस […]

विन्रमता का स्वभाव रखिए अहंकार को त्यागकर रखिए व्यक्तित्व खुद निखर जाएगा यश,कीर्ति बल आ जाएगा झुकने से ही बड़ा बनता है झुकने वाला ही निखरता है जो झुके नही अभिमानी है देहभान में वह अज्ञानी है निरहंकार में रहकर तो देखो दुसरो के आगे झुककर देखो आप ही श्रेष्ठ […]

शहीदों की कहानी याद है आँख में वो पानी याद है भूल पाएंगे नही कुर्बानियां जोश उनका जवानी याद है शहादत को सत सत नमन अब तलक निशानी याद है अमर हो गए,मर सकते नही की है हमपे मेहरबानी याद है आँसु को कोई रोक पाया नही शोक में है […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।