कांटों भरी हैं जीवन की राहें, आशाएं नजर ना आएं। उलझन भरा है ये जीवन सारा, मिले ना सुकून की बाहें । लेकर खंजर खड़े हैं अपने, किस पर भरोसा जताएं। उम्मीदें लगाएं बैठे हैं जिनसे, वो ही हमें तड़पाएं। मांगे कभी जो मदद किसी से, वो राहों में कांटे […]

पहले शासक भेष बदलकर आमजनता के बीच जाते थे किसकी, क्या, समस्या है मौके पर देखकर आते थे अब शासक आमजनता से बेहद की दूरी बनाता है आमजनता के बीच जाने पर खाकीवर्दी बीच मे लाता है आमजन तो मिल ही नही पाते खास भी धकियाये जाते है जो अधिकारियों […]

बदल जाती है तारीखें यहाँ वक्त भी हरदम बदल जाता यहाँ अपने अपने ना रह पाते यहाँ तो भला गैरों से शिकवा कैसा? मुलाकात होकर भी बात नही होती साथ रहकर भी एहसास नही होता बयां करके भी खामोशी नही टूटती तो भला नादानों से शिकवा कैसा? बादल होकर भी […]

ज्ञान धर्म की तरफ मेरा ध्यान बड़ता जा रहा है। जीवन का सच्चा अर्थ हमे समझ आ रहा है। बिना धर्म के मुक्तिपथ हमें मिल नहीं सकता। इसलिए हर कोई धर्म से जोड़ता जा रहा है।। जब से तुम आये हो इस संसार में। तब से लेकर अबतक तुमने किया […]

समय नही है भाई अब कह नही सकते स्वयं को स्वयं से दूर कर अब रह नही सकते जो समय मिला है उसे सार्थक बना लो प्रभु याद में रहते हुए घर को मंदिर बना लो सबसे से पहले मन की साफ सफाई कीजिए जो द्वेष भाव बसे है उन्हें […]

हे मातृभूमि ! भारत माता, तुमको शत शत करें नमन। प्रेम से हम सब शीश झुकाएं, श्रृद्धा सुमन करें अर्पण। तुम पर न्योछावर माता मेरी, ये तन मन , सारा जीवन। हरा भरा है आंचल तेरा मां , जिसको लहराए मस्त पवन। सागर तेरे मां चरण पखारें, है मुकुट हिमालय […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।