जब दरवाजा खोला,तुम्हारी आँखों में आँसू चेहरे पर बेबसी थी | पहले क्यों नहीं बताया तुमने,मेरी ऊँगली दरवाजे में फंसी थी || गमले के फूल गिर जाते है,जब तुम आती हो | क्या तुम अंधी हो,बेचारे गमले से टकराती हो || तुझ को तुझ से चुरा लू,कहने को तो बड़ी […]

याद आ रहे है हमे, वो बचपन के दिन। जिसमे न कोई चिंता, और न ही कोई गम। जब जैसा जहां मिला, खा पीर हो गए मस्त। न कोई जाति का झंझट, न कोई ऊंच नीच का भेद। सब से मिलकर रहते थे, जैसे अपनो के बीच । पर जैसे-2 […]

गुजर जाएगी जिंदगी, मोहब्बत करते करते। निकल जायेंगे गम, मोहब्बत करते करते। संभल जाऊंगा में अब, मोहब्बत करते करते। भूल जाऊंगा पुरानी यादें, मोहब्बत करते करते। बसाऊंगा नई जिंदगी, मोहब्बत करते करते। मिला है दोस्त हमे, मोहब्बत करते करते। बनी है जो मेरी संगनी, मोहब्बत करते करते। बदल कर रख […]

मेरे सर पे दुवाओं का घना साया है। ख़ुदा जन्नत से धरती पे उतर आया है।। फ़कीरी में मुझे पैदा किया, पाला भी। अमीरी में लगा मुँह – पेट पे, ताला भी।। रखा हूँ पाल, घर में शौक से कुत्ते, पर। हुआ छोटा बहुत माँ के लिए, मेरा घर।। छलकती […]

खुशियों का देखा खुमार बचपन में आपस मे है कितना प्यार बचपन में बच्चे बच्चे मोहब्ब्त कितनी लुटाते है लगा खुशियों का अम्बार बचपन में कट्टी कभी मिठ्ठी भी होती रहती साथी पर है ऐतबार बचपन में याद आते है वो स्कूल वाले दिन होता नहीं कोई लाचार बचपन में […]

ईश्वरीय मत पर जो चले अच्छा पथ ही उसे मिले व्यर्थ के चिंतन से बचे रहे सदैव स्वस्थ व सुखी रहे जो हो रहा है अच्छा माने ईश्वर का ही कृत्य माने फिर चिंता काहे की करना बिना वजह काहे को डरना ईश्वरीय याद कभी न खोना सदा खुशी से […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।