Archives for काव्यभाषा

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आधार

गर जीवन में आज छाई है बहार, तो पिता ही है इस मूल का आधार. उंगली पकड़ चलना है सिखाया, पर कंभी न छोड़ा हमें बीच मझधार. माँ सुनाए लोरी…
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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप

राणा उदयसिंह , के सपूत , थी , उनकी राजपूती शान । आओ ! मिलकर सब करें  , महाराणा प्रताप , का सम्मान ।। राणा प्रताप , का नाम सुनके…
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पिता आधार शीला सबकी

पिता साधना है जीवन की पिता भावना है तरक्की की । पिता मुस्कान है बचपन की पिता आराधना है संस्कार की ।। पिता परिभाषा है योगासन की पिता अभिव्यक्ति है…
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अमीर गरीब

ईद इंसान मे इंसानियत लाती है ईद भाईचारा और मोहब्बत लाती है ईद ईद जो सब्र का पैमाना है ईद जो खुशियों का खजाना है ईद जो सब्र का तोहफा…
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रिश्ता 

इस बात का डर है वो कहीँ रूठ न जायें I नाजुक से है अरमान मेरे टूट न जायें l फूलों से भी नाजुक है उनके होठों की नरमी I…
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“विशुद्ध वंदना”

वेष दिगम्बर धारी मुनिवर करुणा अब जगाएँगे पार करो खेवैया नहीं तो हम भव में ठहर जाएँगे भक्ति भाव से आपको पुकारें हे! विशुद्ध महासंत कृपा प्रकटाओ अपनी नहीं तो…
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