जीव

Read Time4Seconds
atul sharma
माना कि इस मौत से  हर एक जीव डरता है,
मगर दुखों से कौन सरोकार पसन्द करता है।
जीव कष्ट भोगकर भी जीने की लालसा रखता है
दुख-अपमान के घूँट पीकर चाहें हर रोज़ मरता है
बुढ़ापे में फीके पड़ते गये जीवन की रंगोली- रंग
भजन भूल कर दुख ही बाँटे अपने जीवनसाथी संग
सत्कर्म करे,ईश भजन भजै, दुख मिटै कटै सब पाप
वरना बुढ़ापा बुरी बीमारी, बेटा बन बैठता बाप
सुख दुख कर्मों पर आधारित, गीता ज्ञान कराती है
चक्षु हटा दिव्य ज्ञान से,नश्वर जग की याद सताती है
जग में चमकने की इच्छा से पाप की झोली भरता है
माना कि  इस मौत से  हर एक जीव डरता है…
मानव तो कुछ स्वार्थों में इस कदर अंधा हो गया है
ज़रा बताओ क्या आज उदय राक्षसों का हो गया है
राक्षस वृत्ति यही है जिसमें न त्याग-भाव का हो वास
दुख पाने है तो ऐसे ही जीते रहो, शावाश बेटे शावाश!
ईर्ष्या दूर भागे मन से ज्यों डर भागे सूरज से शबनम,
ऐसी रीति चले प्रीति की,सर मिल गायें इल सरगम।
ऐसे कर्म कराओ भगवन,ना दुख से होना पड़े दो-चार ,
भर दो करुणा,प्रीति हृदय में,भर दो शुद्ध दया विचार।
सौ वसंत देख चुका बूढ़ा भी ,जीने का सपना रखता है,
माना कि  इस मौत से  हर एक जीव डरता है…

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दोस्त 

Thu Aug 30 , 2018
चेहरा भूल जाओगे तो शिकायत नहीं करेंगे/ नाम भूल जाओगे तो गिला नहीं करेंगे/ और मेरे दोस्त दोस्ती कि कसम है तुझे / जो दोस्ती भूल जाओगे तो कभी माफ़ नहीं करेंगे / ख़ुशी से दिल आबाद करना मेरे दोस्त / और गम को दिल से आज़ाद करना / हमारी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।