अतुल ज्वाला : हास्य की इंदौरी परिभाषा

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रश्मिरथी

अतुल ज्वाला : हास्य की इंदौरी परिभाषा

● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

गम आँसू खामोशी को शर्मिंदा रखने के लिए,
कुछ जगह रखिये हँसीं का परिंदा रखने के लिए ।
उदासी मत सजाइये चेहरे के गुलदान में,
हँसी बहुत जरूरी है खुद को जिंदा रखने के लिए ।
-अतुल ज्वाला

हास्यमेव जयते के सूत्र की जब बात होगी, हिन्दी कवि सम्मेलन मंचों पर हँसी-ठिठोली, व्यंग्य और कविता की जब कहानी लिखी जाएगी, काका हाथरसी और प्रदीप चौबे जी की हास्य कविता की परंपरा के अद्वितीय सिपाही, जिन्होंने डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. सुरेंद्र शर्मा की तरह ही काव्यात्मक हास्य को कविता के मंचों पर आज तक जीवित रखा, ऐसे उम्दा मंचीय हास्य रस के कवि अतुल व्यास जिन्हें जनता अतुल ज्वाला के नाम मे बख़ूबी जानती है।

कवि सम्मेलनों के प्रारंभ के दो ही मुख्य कारण थे, पहला तो उस दौर में जनता के पास मनोरंजन हँसी-ठिठोली के कोई परंपरागत साधन जैसे- टीवी, कम्प्यूटर, मोबाइल जैसे आधुनिक साधन नहीं हुआ करते थे तो लोग मनोरंजन इत्यादि के लिए नाटक, रामलीला सहित कवि सम्मेलन इत्यादि में रुचि लिया करते और दूसरा कारण राष्ट्र जागरण के लिए कविता का उपयोग।

19वीं सदी के दौर में हिन्‍दीभाषियों ने सृजन के प्रति उत्‍साह भी दिखाया और राष्ट्र धर्म व राष्ट्रभाषा के लिए आं‍दोलन भी किया गया। इसी दौरान स्‍थान-स्‍थान पर काव्‍य गोष्ठियाँ होने लगीं। भारतीयों ने इन काव्‍य गोष्ठियों में न केवल अंग्रेज़ी सरकार का विरोध शुरू किया, वरन वे राष्ट्रीय चेतना की संवाहक बन गईं। यानी कि मनोरंजन के लिए कविता का मंच सजने लगा और इसकी प्रतिष्ठा के सापेक्ष ही कवि सम्मेलनों में हास्य कविता का वजूद स्थापित होने लगा।

इन्दौर की रत्नगर्भा धरती ने देश को कई नामचीन साहित्यकार, कवि, खिलाड़ी, गायक-गायिका, चित्रकार इत्यादि दिए हैं, उन्हीं रत्नों की खान से विलक्षण प्रतिभावान कवि अतुल ज्वाला भी देश और दुनिया को दिए हैं। पिता ओमप्रकाश जी व्यास और माता पुष्पा व्यास जी के घर 1 अप्रैल 1978 को एक सुधि पुत्र का जन्म हुआ, जिनका नाम अतुल रखा गया। प्रारंभिक शिक्षा सुखेड़ा गाँव में हुई और महाविद्यालयीन पढ़ाई रतलाम जिले की जावरा तहसील में स्थित भगतसिंह महाविद्यालय से हुई। अतुल ज्वाला ने अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों विषयों में एम.ए. की पढ़ाई की। आपका विवाह रूपीका व्यास जी से हुआ एवं आपके दो पुत्र जागृत एवं प्रद्युम्न हैं। लगभग 2 दशकों की काव्य यात्रा में देश और दुनिया के हज़ारों मंचों पर आपने पैठ भी जमाई है और श्रोताओं की पसन्द के कवि के रूप में अपनी पहचान भी अर्जित की है। श्री ज्वाला जी की एक पुस्तक ‘कलम कुछ कहती है’ प्रकाशित हो चुकी है। अमृतलाल नागर सम्मान लखनऊ, श्रेष्ठ संचालक इत्यादि सम्मान श्री अतुल ज्वाला की उपलब्धियों में उल्लेखित हैं। कुशल मंच संचालक एवं उम्दा हास्य कवि अतुल ज्वाला की रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में अतुल ज्वाला प्रोडक्शन के माध्यम से लगातार रचनात्मक कार्य जारी हैं। नए प्रतीकों को तरलता से बुनकर कविता को पाठक मन तक पहुँचाने वाले साधक को दुनिया ‘अतुल ज्वाला’ कहती है।

अतुल ज्वाला
रस -हास्य रस
अनुभव – 2 दशकों से अधिक
निवास- इंदौर (मध्यप्रदेश )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।