Archives for मातृभाषा

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राष्ट्रसंत न खोना पड़ता….

शायद हमें एक संत ना खोना पड़ता! ये हमारी परम्परा सी बन गई है कि हम मरने के बाद सब को "स्वर्गीय" मान लेते हैं। इसके लिए अपने तर्क हो…
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जिंदगी का वास्तविक अनुभव सीखा

पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा.... छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर…
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विश्व पर्यावरण दिवस पर कुछ सवाल अपने आप से…

आज विश्व पर्यावरण दिवस पर आइये अपने आप से कुछ सवाल करें...कि आने वाली पीढ़ी के लिए हम कैसी धरती और कैसा पर्यावरण देने जा रहे हैं... यह प्रश्न हमारे…
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गद्य लेखन का महत्व

यह विषय एक बहुत ही सार्थक चिंतन का पर्याय है। गद्य लेखन का महत्व क्या है?? पर इस पर विमर्श के पूर्व ये आवश्यक है कि समझा जाए कि गद्य…
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एक अल्हड़ दीवाना कवि: राजकुमार कुम्भज

  सहज, सौम्य और सरल जिनका मिजाज है, सबकुछ होते हुए भी फकीराना ठाठ, आजा़द पंछी की तरह गगन को नापना, मजाक और मस्ती की दुनिया से कविता खोजने वाले,…
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