परेशान शिक्षक 

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atul sharma
प्राइमरी का परेशान मास्टर,
भयानक सपना देख रहा था।
सपने में ही सेल्फी से खिंचा,
 फोटो अपना देख रहा था।।
पल- पल, हर-पल, फोटो उसे,
खींचने का पैगाम मिला था।
खुद को साबित करने हेतु,
ऐसा काम मिला था।।
प्रश्नों से घिरा बेचारा,
भले ही गहरी नींद में खोया था।
हर उत्तर की खोज में वह,
उलझा-उलझा ही सोया था।।
भागते -दौड़ते- हांफते,
अब स्कूल आ जाता है।
इबादत की बेला में भी,
अपने को बेचैन पाता है।।
तुगलकी फरमानों की,
अब उसे याद सताती है।
कैमरे में बच्चों सहित खुद को,
 कैद करने की बारी आती है।।
कैमरा साध निशाना बनाया,
 फलों को भी तुरंत बंटवाया।।
अब योग कराने की बारी है,
साथ ही फोटो खींचने की तैयारी है।।
अब प्रबंध समिति के,
अध्यक्ष को भी खोज निकाला।
उधर खेल खिलाने को,
ऑफिस से फुटबॉल निकाला।।
यह फोटो भी उसने,
बड़े ही चाव से खींचे।
स्वतंत्रता दिवस पर लगे,
मैदान के पौधे भी सींचे।।
पर्यावरण सुरक्षा की,
उसकी खासी जिम्मेदारी थी।
और दूध पीते बच्चों की अब,
फोटो खींचने की बारी थी।।
उधर रसोई घर में,
करछली -चिमटा बजने  लगे।
रोटी-सब्जी की धुन में,
सारे बच्चे मटकने लगे।।
उधर गुरुजी मां- समूह सदस्य की,
खोज में भटक रहे थे।
भोजन चखाने और फोटो खिंचाने को,
प्राण कंठ में अटक रहे थे।।
इससे पहले हाथ धोने का,
जो फोटो तैयार किया था।।
साबुन तौलिया की बाधाओं से,
भवसागर को पार किया था।।
 अब खाना खाते बच्चों की,
 तस्वीर खींचनी थी।
जो कि अफसरानों को,
हर रोज भेजनी थी।।
शपथ और बैठकों जैसे,
कुछ और भी फोटो भेजने थे।
उपस्थित – अनुपस्थित बच्चों के,
हाल भी, फिलहाल भेजने थे।।
इसी फोटोग्राफी में बेचारा,
पल- पल अटकता रहा।
पाठ-पढ़ाने की चिंता में,
मायूस -सा भटकता रहा।।
गले में इतने फंदे डालकर,
जिंदा होकर भी मर रहा था।
वेतन रुकने की चिंता में,
वह सब कुछ कर रहा था।।
सोचो!अगर हर दिन,
ऐसा ही होता रहा।
शिक्षक फोटो खींचकर,
एलबम संजोता रहा।।
ऐसे फिर बाल अधिकारों को,
हम कैसे रखाऐंगे।
अशिक्षा के भूत को,
ना जाने कैसे भगाएंगे।।
माना यह एक सपने की,
दास्तां चल रही थी।
मगर सोचो! इसमें कितनी,
हकीकत झलक रही थी।।

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl

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  1. हिंदी साहित्य के लिए समर्पित संस्था।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।