माँ!माँ शब्द नहीं,भंडार है,
बच्चों की सम्पूर्ण संसार है।
माँ भावना और अहसास है,
एक संवेदना और विश्वास है।
माँ हम बच्चों की आवाज है,
हमारे जीवन की आगाज है।
माँ में भगवान जी का वास है,
वो हमारी हरपल की सांस है।
माँ मजधार की किनारा है,
हमारे जीवन की सहारा है।
माँ मेरे आंखों की रोशनी है,
मेरे जिंदगी की हर खुशी है।
मेरी माँ त्याग की प्रतिमूर्ति है,
मेरी माँ ममता की एक मूर्ति है।
माँ हमारे जीवन की तपस्या है,
करती दूर हमारी हर समस्या है।
माँ शरीर के आत्मा की भवन है,
माँ की छाया भी सबसे पावन है।
माँ ही राधेकृष्ण और सीताराम हैं,
माँ के चरणों में ही तो चारो धाम हैं।
माँ बच्चों के कष्टों की सिसकी है,
माँ ही हमारे यादों की हिचकी है।
माँ हमारे जीवन की सम्पूर्ण सृष्टि है,
माँ ही धूप-छाँव और बादल-वृष्टि है।
माँ एक अध्याय नही पूर्ण ग्रन्थ है,
माँ जीवन की सबसे बड़ी सन्त है।
माँ तो धूप में हमारे लिए छाया है,
माँ प्यास में हमारे लिए दरिया है।
माँ कभी भी जीवन में थकती नहीं,
माँ अपने कर्मों से कभी बचती नहीं।
माँ मेरे लिए मन की एक दर्पण है,
माँ हमारे लिए प्राणवायु जीवन है।
माँ ही हमारे जीवन की आधार है,
माँ ही हमारे जीवन की श्रृंगार है।
माँ के बिना यह जीवन अधूरा है,
उनकी खुशी में ही सबकुछ मेरा है।
हम सभी माँ के आँखों के तारे हैं,
हमसभी तो जीते उनके सहारे हैं।
हे माँ!जग में तुमसे ही है मेरा नाम,
हे माँ!तेरे चरणों में शत शत प्रणाम।
हे माँ!तेरे चरणों में शत शत प्रणाम।।
#केशव कुमार मिश्रा
परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।