सबसे बड़ा रोग,क्या कहेंगे लोग

pinki paturi
सबसे पहले यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि,हम स्वयं से क्या चाहते हैं ? यानी हम स्वयं अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं,क्योंकि वास्तव में चाहे जितना भी हम अपने आसपास में देखें, सीखें या समझें,या कोई प्रेरणा दे तो भी, हम करते वो ही हैं जो हमारे अंतर्मन की आवाज होती है। अब यदि अंतर्मन की आवाज आई और हमने उस कार्य को किया,तथा यदि एक बार भी मन में यह विचार आया कि,यह कार्य में सबके सामने नहीं कर सकती या सकता,तो निश्चित ही वह सही नहीं है। नैतिकता, सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से वह विचार सही नहीं होता जो अपराध-बोध कराए,और यदि अपराध-बोध नहीं है तो वह कार्य बिल्कुल सही है। बस,यह सोचना छोड़ना होगा कि लोग क्या कहेंगे ??
लोग तो सही को भी गलत ठहराते हैं,वो माहिर भी होते हैं इस तरह के काम में। ईर्ष्या,द्वेष एवं जलन जैसे सभी कारणों से लोगों को गलत टिप्पणी करने की आदत होती है।
मैंने ऐसे बहुत से उदाहरण देखे हैं,जब लोग किसी की टांग खींचने के लिए कुछ भी बिना सोचे-समझे बोल देते हैं। यदि सामने वाला व्यक्ति कमज़ोर है,तो वो शांत रह जाता है,और यदि वह लोगों के कहने की उपेक्षा करते हुए अपने कार्य बिना व्यथित होकर करता रहता है तो निश्चित ही सफलता प्राप्त करता है। तब बोलने वालों के मुंह भी बंद हो जाते हैं। जो लोग स्वयं के कार्य पर ध्यान केन्द्रित करने की बजाय दूसरों पर टीका-टिप्पणी करने में ही समय व्यतीत करते हैं,वो किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे ही जो लोग टिप्पणियों से आहत होकर अपना कार्य क्षेत्र बार-बार बदल लेते हैं,वे भी ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाते हैं।
इसलिए,बहादुरी के साथ आगे बढ़ते हुए-‘लोग क्या कहेंगे,’यह विचार त्याग दें तो, निश्चित ही हम और आप सफलता के शिखर को छू सकेंगे।
                                                                                #पिंकी परुथी  ‘अनामिका’ 
परिचय: पिंकी परुथी ‘अनामिका’ राजस्थान राज्य के शहर बारां में रहती हैं। आपने उज्जैन से इलेक्ट्रिकल में बी.ई.की शिक्षा ली है। ४७ वर्षीय श्रीमति परुथी का जन्म स्थान उज्जैन ही है। गृहिणी हैं और गीत,गज़ल,भक्ति गीत सहित कविता,छंद,बाल कविता आदि लिखती हैं। आपकी रचनाएँ बारां और भोपाल  में अक्सर प्रकाशित होती रहती हैं। पिंकी परुथी ने १९९२ में विवाह के बाद दिल्ली में कुछ समय व्याख्याता के रुप में नौकरी भी की है। बचपन से ही कलात्मक रुचियां होने से कला,संगीत, नृत्य,नाटक तथा निबंध लेखन आदि स्पर्धाओं में भाग लेकर पुरस्कृत होती रही हैं। दोनों बच्चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाने के बाद सालभर पहले एक मित्र के कहने पर लिखना शुरु किया था,जो जारी है। लगभग 100 से ज्यादा कविताएं लिखी हैं। आपकी रचनाओं में आध्यात्म,ईश्वर भक्ति,नारी शक्ति साहस,धनात्मक-दृष्टिकोण शामिल हैं। कभी-कभी आसपास के वातावरण, किसी की परेशानी,प्रकृति और त्योहारों को भी लेखनी से छूती हैं।

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