
हाथों का श्रंगार ये मेंहदी।
बाबुल का प्यार ये मेंहदी।।
जैसे – जैसे ये गहरी होती,
बनें प्रीत कि हार ये मेंहदी।।
मेंहदी हाथों में शोभित हो,
दे जाती आकार ये मेंहदी।।
दो दिल में जान सी रहती,
रंगो की बौछार ये मेंहदी।।
खुशियों की सौगाते बाँटे,
होती ना लाचार ये मेंहदी।।
प्रीत पलों को महकाती ये,
मान रही आभार ये मेंहदी।।
#नवीन कुमार भट्ट
परिचय :
पूरा नाम-नवीन कुमारभट्ट
उपनाम- “नीर”
वर्तमान पता-ग्राम मझगवाँ पो.सरसवाही
जिला-उमरिया
राज्य- मध्यप्रदेश
विधा-हिंदी

