
चिंता बनी चिता हूँ मैं।
हाँ, एक पिता हूँ मैं॥
तन्हा-तन्हा चलता हूँ,
सूरज जैसा ढलता हूँ।
बिन पानी पौधे जैसा,
आँसू जैसा पलता हूँ॥
कभी-कभी ऐसा लगता,
इक अधूरी खता हूँ मैं।
हाँ, एक पिता….॥
अपनी सोच में खोया हूँ,
हँसते-हँसते रोया हूँ।
काट रहा हूँ मैं उसको,
वही जिसे, मैं बोया हूँ॥
जीवन जहाँ से शुरू हुआ,
वही खोया पता हूँ मैं।
हाँ, एक पिता हूँ मैं….॥
#अवनेश चौहान ‘कबीर’
परिचय: अवनेश चौहान ‘कबीर’ की जन्मतिथि-१ जुलाई १९८५ और जन्म स्थान-चन्दौसी है। आप उत्तर प्रदेश राज्य के शहर-चन्दौसी(जिला-संभल) निवासरत हैं। स्नातक तक शिक्षित श्री चौहान का कार्यक्षेत्र-वित्त है। आप अधिकतर दोहे रचते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-आत्मिक संतुष्टि है।
Tue Oct 3 , 2017
मधुबन जीवन,एक महकता, तपती धरा तब नीर बरसता। राही तू क्यों, छांव तलाशे? आलौकित कर जीवन पथ को, जो मिल जाए,तू अपना रे राह पर अपनी बढ़ता जा रे। सुख की रातें गन्ध मारती, दुःख ही है सुखों का सारथी। जलकर बाती उजियारे पाती, मिले न इच्छित तो जश्न मना। […]