पिछली रात हुई बरसात 

shubham soni
पिछली रात हुई बरसात ,
और पानी सड़कों पर आया।
भोर हूई और देख हाल,
मेरा तो बस मन भर आया।
कहीं डालियां टूटी बिखरी है,
कहीं कीचड़ की नदियां दिख रही है।
सब और हलचल छा गई है,
और जनता सारी चीख रही है।
लगता है आँधी भी थी इस बारिश के साथ,
पिछली रात हुई बरसात॥
सड़कें टूट गई हैं और हालत कुछ खस्ता है,
ये घोटालों का नतीजा है और कर्मचारी सस्ता है।
आना-जाना वाहनों का मुश्किल-सा हो बैठा है,
पैदल चलना भी दूभर है, टूटा सारा रस्ता है।
कुछ जर्जर मकान गिर गए, उनका मलबा भी फैला है ,
मालूम नहीं कुदरत ने ये कैसा खेल खेला है।
देख यह सब ,मुझे जैसे,लगा कोई आघात,
पिछली रात हुई बरसात॥
अट्टालिकाओं के मालिक खुश हैं  पर गरीब इस बार तरसा है,
कुछ घर तो बेघर हो गए,शायद पानी ज़मकर बरसा है।
पौधे टूट गए और फसलों की हालत काफी बुरी है,
कुछ की आधी खराब तो कुछ की खराब पूरी है।
पीपल के नीचे निगाह गई तो देखा पक्षी मृत पड़े हैं,
दुसरी और कुछ लोग अपने ही घर से बाहर खड़े हैं।
पानी घरों में भर गया और परेशान हुई गरीब जात,
पिछली रात हूई बरसात।
कुछ नया नजर नहीं आया है बस पुराना भी नष्ट हुआ,
कुछ मुआवजा मिला होगा पर लोकतन्त्र भी भ्रष्ट हुआ।
जब बरसता बादल है तब हर बार यही होता है,
अमीर वर्ग हंसता रहता है और दीन वर्ग रोता है।
देखा है मैंने कई बार, वो टपकती छत के नीचे सोता है,
पर नींद नहीं आती क्योंकि छत गिरने का डर होता है।
किसी से कहो तो कहते हैं,कि छोड़ो न ये बात,
पिछली रात हुई बरसात॥
                                                                    #शुभम सोनी
परिचय: शुभम सोनी का निवास सोनी मरुस्थली राज्य राजस्थान के चुरु में है। १७ साल के शुभम का जन्म स्थान-लालगढ़ (चुरु) है। शिक्षा बी.कॉम. जारी है। कविता लिखना अधिक पसंद है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।