शहद प्यार का

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vijay gunjan
आज अपना वतन ही बेगाना हुआ,
हक़ की खातिर लड़े तो हर्जाना हुआ।
नाक नीचे से मुजरिम गुज़र चल गया,
घर निरपराध का ही निशाना हुआ।
पाक सदियों से जो था सदन अब तलक,
आज पाखंडियों का ठिकाना हुआ।
मेरे व्रण पर लवण नित छिड़कते रहे,
उफ़ ज़रा कर दिया तो बहाना हुआ।
न्याय पाने की उम्मीद में था चला,
भर उमर के लिए कैदखाना हुआ।
घोल ‘गुंजन’ गज़ल में शहद प्यार का,
कि चमन मुल्क़ का कातिलाना हुआ।
                                                                                      #विजय गुंजन
परिचय : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा साहित्यिक अवदान के लिए विजय गुंजन को पुरस्कृत किया जा चुका है। शंकरदयाल शर्मा स्मृति संस्थान द्वारा भी नवगीत रत्न सम्मान दिया गया था। आप बिहार राज्य के निवासी हैं। साथ ही बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में २०१४ में गीतकार के रूप में आरसी प्रसाद सिंह  सम्मान पत्र भी प्राप्त किया है। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।