मैं निर्जीव हूँ

kumari archana
मैं निर्जीव हूँ
मेरा भी सम्मान करो,
मुझमें तुम्हारी जैसी जान नहीं
बोल नहीं पाता,
हँस नहीं पाता
रो नहीं पाता
पर मेरी दयनीय दशा
हाल बयाँ करती है,
मुझे भी इन्सानों जैसा साफ सुथरा व
समय-समय पर मरम्मत करते रहो।
मैं खुद पर हुए प्रहार को
रोक नहीं पाता,
न ही अपनी जीवन रक्षा हेतु
आवाज़ उठा पाता,
चाहे मारो या काट दो
पेड़ पौधे व पशु पक्षी
जीव जन्तु भी मेरे जैसे हैं,
वो भी बोल नहीं पाते
वो भी किसी को जीवन देते
बिना लाभ के फल देते,
मर-खपकर भी खाद बन जाते
दूसरों के उपयोग में खुद उपयोग हो जाते।
मैं निर्जीव हूँ,
पर जब तक टूट-फूट नहीं जाता
तुम्हारे प्रयोग की वस्तु बन उपयोग होता रहता हूँ,
नष्ट होकर भी कुछ न कुछ दे जाता हूँ
मेरी प्लास्टिक व कम्प्यूटर की बनी वस्तुएँ
मिट्टी में नष्ट नहीं हो पाती, और
पर्यावरण को निरन्तर नुकसान
पहुँचाती रहती,
बाकी निर्जीव वस्तुँ स्वत: हो नष्ट हो जाती
सृष्टि की रचना ही कुछ ऐसी है
मैं निर्जीव हूँ,
मेरा भी सम्मान करो।

                                                                 #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला हरिश्चन्द्रपुर(पूर्णियाँ) की निवासी हैं।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।