तिरंगा

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harish soni
मैं तिरंगे के लिए जान भी दे जाऊंगा,
मेरे इस ध्वज को चंहुओर मैं फहराऊंगा l 
आंच आने नहीं दूंगा मैं सरज़मीं को कभी,
मैं हर-एक सोए हुए शख़्स को जगाऊंगा ll 
 
मेरा ईमान मेरी जान ये तिरंगा है,
मेरी धड़कन की भी पहचान ये तिरंगा है l 
जीत के भाव से लबरेज है ये ध्वज मेरा,
शहीद-ए-वीर का श्रंगार ये तिरंगा है ll 
 
मेरा हर राग मेरा गीत ये तिरंगा है,
मेरे छोटे से दिल का मीत ये तिरंगा है l 
इसके चरणों में मेरा बार-बार वंदन है,
मेरे इस मुल्क की हर रीत में तिरंगा है ll 
 
निराला,सूर के शब्दों में महक इसकी है,
कभी कोयल-कभी बुलबुल की चहक इसमें है l 
मेरे इस ध्वज में सारी कायनात बसती है,
ज़मी आकाश रसातल की महक इसमें है ll 
 
मैं तिरंगे के………..मेरे इस ध्वज………l 
आंच आने नहीं…….मैं हर-एक सोए……ll
                                                                         #डॉ. हरीश ‘पथिक’
परिचय : मध्यप्रदेश के डॉ.हरीष कुमार सोनी पेशे से अध्यापक हैं,और साहित्यिक नाम ‘पथिक’ लगाते हैंl आप सीहोर रोड की कालापीपल मंडी(जिला शाजापुर,म.प्र.) में रहते हैंlरूचि पढ़ाई,कविता और कहानी सहित कभी-कभी मंचों पर कविता पाठ में भी हैl  कई दैनिक अखबारों के साथ अन्य पत्रिकाओं में भी कविता एवं लेख प्रकाशित होते रहते हैं। कुछ शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए हैं। आपकी पीएच.डी. का विषय-हिन्दी एवं शीर्षक-`अज्ञेय की कहानियॉं:संवेदना और शिल्प` थाl   

   

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।