तिरंगा

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harish soni
मैं तिरंगे के लिए जान भी दे जाऊंगा,
मेरे इस ध्वज को चंहुओर मैं फहराऊंगा l 
आंच आने नहीं दूंगा मैं सरज़मीं को कभी,
मैं हर-एक सोए हुए शख़्स को जगाऊंगा ll 
 
मेरा ईमान मेरी जान ये तिरंगा है,
मेरी धड़कन की भी पहचान ये तिरंगा है l 
जीत के भाव से लबरेज है ये ध्वज मेरा,
शहीद-ए-वीर का श्रंगार ये तिरंगा है ll 
 
मेरा हर राग मेरा गीत ये तिरंगा है,
मेरे छोटे से दिल का मीत ये तिरंगा है l 
इसके चरणों में मेरा बार-बार वंदन है,
मेरे इस मुल्क की हर रीत में तिरंगा है ll 
 
निराला,सूर के शब्दों में महक इसकी है,
कभी कोयल-कभी बुलबुल की चहक इसमें है l 
मेरे इस ध्वज में सारी कायनात बसती है,
ज़मी आकाश रसातल की महक इसमें है ll 
 
मैं तिरंगे के………..मेरे इस ध्वज………l 
आंच आने नहीं…….मैं हर-एक सोए……ll
                                                                         #डॉ. हरीश ‘पथिक’
परिचय : मध्यप्रदेश के डॉ.हरीष कुमार सोनी पेशे से अध्यापक हैं,और साहित्यिक नाम ‘पथिक’ लगाते हैंl आप सीहोर रोड की कालापीपल मंडी(जिला शाजापुर,म.प्र.) में रहते हैंlरूचि पढ़ाई,कविता और कहानी सहित कभी-कभी मंचों पर कविता पाठ में भी हैl  कई दैनिक अखबारों के साथ अन्य पत्रिकाओं में भी कविता एवं लेख प्रकाशित होते रहते हैं। कुछ शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए हैं। आपकी पीएच.डी. का विषय-हिन्दी एवं शीर्षक-`अज्ञेय की कहानियॉं:संवेदना और शिल्प` थाl   

   

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इक मुहब्बत भरी डगर रखिए, दिल का आबाद नगर रखिए l  कट नहीं सकता है सफ़र तन्हा, जीस्त का कोई हमसफ़र रखिए l  क्यूं इनायत है बस परायों पर, मेरी जानिब भी तो नज़र रखिए l  जानिए क्या अगल-बगल हो रहा, ऐसे मत खुद  को बेख़बर रखिए l  डर के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।