दिल बौने हैं सीने में पर,
ऊंचा कद पा जाते हैं।
फितरत ओछी रखने वाले,
ऊंचा पद पा जाते हैं॥
पदवी के चक्कर में खाते,
भारत माँ की कसमें ये।
सत्ता का सुख भोग लिया तो,
तोड़ रहे हैं रस्में ये॥
भारत में हैं नहीं सुरक्षित,
अब ये जुमले बन्द करो।
काम अरे ओ नमक हरामों,
देश भले के चंद करो॥
#डॉ. सुरेश अनजान
परिचय: डॉ. सुरेश अनजान मध्यप्रदेश के सोयत(आगर मालवा) में रहते हैं। जन्म-५ अक्टूबर १९७९ को गांव-लोहारिया में हुआ है। शिक्षा बीएससी सहित जनरल नर्सिंग एन्ड मिडवाइफरी (बेंगलुरू) और मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं। देश में जागृति फैलाने के लिए आपने
लेखन विधा में ओज व वीर रस को अपना रखा है। लेखन का उद्देश्य यही है कि,लोगों में देशप्रेम बना रहे। उन्हें देश के प्रति अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करते रहते हैं।
Thu Aug 17 , 2017
कैसे करें भरोसा किस पर करें यकीं। खुदगर्ज है जमाना खुदगर्ज है जमीं॥ प्यार की आशा छोड़ दे, न कर कभी यकीं। यहाँ झूठी आस है और प्यार की है कमी॥ होंठो पर हँसी है,आंखों पर है नमी। बाहर से वो है इंसान,पर अंदर से नहीं॥ पग-पग तो है धोखा,जज्बात […]