मातृभाषा हिन्दी

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pankaj mishra
मुझे क्यों भुला रहे हो,
         दूर तुमसे जा रही हूँ..
क्यों नहीं बुला रहे हो,
          अपनी मैं हूँ तुम्हारी..
पहले थी मैं सबको प्यारी,
       बेजुबाँ तुम लोग थे जब..
बोलना मैंने सिखाया,
बहन देवनागरी ने कैसे लिखना है बताया..
अस्तित्व को तुम मेरे क्यों मिटाने जा रहे हो।
दूर तुमसे जा…..॥
मेरी जननी को मिटाया तब जन्म मेरा हो चुका था,
अब क्यों पराई बेटी को तुम गोद लेने जा रहे हो..
फिरंगियों की लाड़ली को क्यों गले लगा रहे हो,
मुझसे पहले बच्चों को उसे क्यों सिखा रहे हो?
दूर तुमसे जा……॥
अपने घरों में आज तुम उसे क्यों सजा रहे हो,
मेरी जगह में बताओ उसे क्यों बिठा रहे हो..
दफ्तरों में देश के तुम उसे ही चला रहे हो,
रूठकर मैं जा रही हूँ क्यों नही मना रहे हो।
दूर तुमसे जा………॥
                                                                                         #पंकज मिश्रा ‘प्रीतम’
परिचय : पंकज मिश्रा ‘प्रीतम’ का स्थाई निवास उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले के टाक बलवाड़ी गाँव में है। बतौर अभिनेता रंगमंच कार्यशालाओं तथा हिन्दी रंगमंच में कार्य करते हैं। आपकी  उम्र २४ वर्ष है।प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद रंगमंच में कार्य करने के साथ साथ जीवन यापन हेतु अंशकालिक कार्य भी करते हैं। अभी इस राज्य में रंगमंच की स्थिति ठीक नहीं होने से वर्तमान में दिल्ली में रह कर रंगमंच कर रहे हैं। 

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।