सूरज जैसा जलना होगा

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sampada
बाधायें आती हैं आयें
चाहे जितना प्रलय मचायें
दुख के दावानल से चाहें
गूँज उठे चहु ओर दिशाएँ
पथ की इन बाधाओं से
हमको हरदम लड़ना होगा,
सूरज जैसा जलना होगा।
जीवन की कंटक राहों में
बिखरे जाने कितने शूल,
आगे बढ़ने की अभिलाषा में
मत जाना मानवता भूल,
टेढ़ी-मेढ़ी इन गलियों से
हमको हरदम चलना होगा,
सूरज जैसा  जलना होगा।
इन पथरीली राहों में हैं
जीवन के सार कई,
सतत  सहज बढ़ते रहने में
कोई दुविधा कहीं नहीं,
इस अद्भुत अनन्य दर्शन का
सूत्रधार बनना होगा
सूरज जैसा जलना होगा।
धाराओं के प्रबल वेग से
कोई नहीं बचा यहाँ,
इसके प्रवाह की कठिन धार में
छुपा है सारा सार जहाँ,
जीवन के इस प्रवाह में
हमको गतिमय रहना होगा
सूरज जैसा जलना होगा।।।।।
#सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।

matruadmin

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।