बाधायें आती हैं आयें
चाहे जितना प्रलय मचायें
दुख के दावानल से चाहें
गूँज उठे चहु ओर दिशाएँ
पथ की इन बाधाओं से
हमको हरदम लड़ना होगा,
सूरज जैसा जलना होगा।
जीवन की कंटक राहों में
बिखरे जाने कितने शूल,
आगे बढ़ने की अभिलाषा में
मत जाना मानवता भूल,
टेढ़ी-मेढ़ी इन गलियों से
हमको हरदम चलना होगा,
सूरज जैसा जलना होगा।
इन पथरीली राहों में हैं
जीवन के सार कई,
सतत सहज बढ़ते रहने में
कोई दुविधा कहीं नहीं,
इस अद्भुत अनन्य दर्शन का
सूत्रधार बनना होगा
सूरज जैसा जलना होगा।
धाराओं के प्रबल वेग से
कोई नहीं बचा यहाँ,
इसके प्रवाह की कठिन धार में
छुपा है सारा सार जहाँ,
जीवन के इस प्रवाह में
हमको गतिमय रहना होगा
सूरज जैसा जलना होगा।।।।।
#सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।
Mon Nov 26 , 2018
बेरोजगार हो गया मन,अब याद किसी की आती नही। मृत हो गए सारे सपने,अब नींद आँखो को आती नही।। बेशर्म हो गए होठ,अब अपमान पर चेहरे पर हँसी है आती। थक गए है अब कदम , बेशर्म मंजिल पास नही है आती।। अब अपने मन को कैसे फिर से मैं […]